नई दिल्ली। दिवालिया हो चुकी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और इसके प्रवर्तक उद्योगपति अनिल अंबानी की परेशानियाँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और बैंक ऑफ इंडिया (BoI) के बाद अब देश के बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) ने भी आरकॉम और अंबानी के ऋण खाते को धोखाधड़ी (फ्रॉड) की श्रेणी में डाल दिया है।
आरकॉम ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई नियामकीय जानकारी में बताया कि उसे 2 सितंबर 2025 को बैंक ऑफ बड़ौदा से एक पत्र प्राप्त हुआ। इस पत्र में कंपनी और उसके प्रवर्तक अनिल अंबानी को ‘फ्रॉड अकाउंट’ घोषित करने की जानकारी दी गई है।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने वर्ष 2010 के आसपास आरकॉम को 1,600 करोड़ रुपये और 862.50 करोड़ रुपये की दो अलग-अलग ऋण सुविधाएँ प्रदान की थीं। कुल मिलाकर बैंक की ओर से कंपनी को 2,462.50 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया था। हालांकि, 28 अगस्त 2025 तक इनमें से 1,656.07 करोड़ रुपये बकाया थे।
बैंक ने अपने पत्र में कहा कि इस खाते को पहले ही 5 जून 2017 से गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित किया जा चुका था।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस कदम को फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट और उसमें दर्ज निष्कर्षों के आधार पर उठाया है। रिपोर्ट में ऋण राशि के कथित दुरुपयोग और गड़बड़ी की ओर इशारा किया गया है।
बैंक का कहना है कि खातों को फ्रॉड घोषित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है और इससे भविष्य में निवेशकों तथा जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा होगी।
रिलायंस कम्युनिकेशंस बीते कई वर्षों से भारी वित्तीय संकट में है और फिलहाल कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य कंपनी के बकाया कर्जों का समाधान निकालना है।
हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि वर्तमान में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) से किसी भी प्रकार की सक्रिय समाधान योजना को मंजूरी नहीं मिली है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अभी तक बकाया कर्ज वसूली का कोई ठोस रास्ता नहीं निकला है।
बैंक के इस कदम पर अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रवक्ता ने कहा कि बैंक ऑफ बड़ौदा की कार्रवाई 12 साल से अधिक पुराने मामलों से जुड़ी हुई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनिल अंबानी ने 2006 में आरकॉम की स्थापना से लेकर 2019 में इस्तीफा देने तक केवल एक गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में कंपनी के बोर्ड में काम किया था। उनके अनुसार, इस दौरान वे कंपनी के प्रबंधन के दैनिक कार्यों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं थे।
बयान में कहा गया है कि अनिल अंबानी ने सभी आरोपों और अभियोगों को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि वे इस मामले में उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे।
यह पहला मौका नहीं है जब आरकॉम और उसके प्रवर्तक के खिलाफ बैंकों और जांच एजेंसियों ने कदम उठाया हो।
भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ इंडिया पहले ही आरकॉम के खातों को धोखाधड़ी की श्रेणी में डाल चुके हैं।
कुछ समय पहले सीबीआई ने भी अनिल अंबानी और आरकॉम के खिलाफ करीब 2000 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज कर उनके परिसरों पर छापेमारी की थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी आरकॉम से जुड़े लेन-देन की जांच करता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों द्वारा बार-बार आरकॉम और अनिल अंबानी के खातों को फ्रॉड घोषित करना उनकी वित्तीय विश्वसनीयता के लिए बड़ा झटका है। इससे भविष्य में अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण लेना और मुश्किल हो जाएगा।
दूसरी ओर, कानूनी लड़ाई लंबे समय तक खिंच सकती है क्योंकि अंबानी पक्ष ने साफ संकेत दिया है कि वे अदालत का दरवाजा खटखटाएँगे।