ऑस्ट्रेलिया की ताइवान नीति पर बरनाबी जॉयस का हमला, मंत्री अमांडा रिशवर्थ ने कहा – “क्षेत्रीय रिश्ते ज़रूरी”

ऑस्ट्रेलिया की ताइवान नीति पर बरनाबी जॉयस का हमला, मंत्री अमांडा रिशवर्थ ने कहा – “क्षेत्रीय रिश्ते ज़रूरी”

14 जुलाई 2025, सिडनी — ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ताइवान के मुद्दे पर “यथास्थिति” (Status Quo) को समर्थन देने की नीति पर नेशनल पार्टी के सांसद बरनाबी जॉयस ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अगर ऑस्ट्रेलिया ने चीन के आक्रामक रुख के सामने स्पष्ट रुख नहीं अपनाया, तो अमेरिका AUKUS रक्षा समझौते में अपनी रुचि खो सकता है।

बरनाबी जॉयस ने ‘सनराइज़’ कार्यक्रम में रोजगार मंत्री अमांडा रिशवर्थ के साथ चर्चा के दौरान कहा, “अगर आप ‘यथास्थिति’ का समर्थन करते हैं और चीन लोकतांत्रिक ताइवान पर कब्ज़ा करता है, तो आप क्या करेंगे? यदि ऑस्ट्रेलिया कुछ नहीं करता, तो अमेरिका कहेगा कि उसे AUKUS समझौते में अब दिलचस्पी नहीं है।”

उन्होंने आगे जोड़ा, “हम बार-बार सुनते हैं कि सरकार रक्षा पर ज़्यादा खर्च कर रही है, लेकिन असल में यह महंगाई की वजह से है। अगर अमेरिका को लगे कि हम उसके ईमानदार और समर्पित सहयोगी नहीं हैं, तो हम अपने देश की रक्षा कैसे करेंगे?”

दूसरी ओर, मंत्री अमांडा रिशवर्थ ने सरकार की स्थिति का बचाव करते हुए कहा, “ऑस्ट्रेलिया और पूरे क्षेत्र के हित में शांति और सुरक्षा बनाए रखना सबसे ज़रूरी है। हम यथास्थिति का समर्थन करते हैं और यह बहुत अहम है। लेकिन हम काल्पनिक स्थितियों पर बात करने में विश्वास नहीं रखते।”

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ इन दिनों चीन की छह दिवसीय यात्रा पर हैं। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रक्षा सलाहकार एल्ब्रिज कोल्बी ने जापान और ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाया है कि वे चीन द्वारा ताइवान पर संभावित हमले की स्थिति में अपनी रणनीति स्पष्ट करें।

सरकार के रुख को लेकर विपक्ष हमलावर है, जबकि लेबर पार्टी के नेता लगातार “काल्पनिक परिस्थितियों” पर टिप्पणी से परहेज़ कर रहे हैं। कार्यवाहक रक्षा मंत्री पैट कॉनरॉय ने भी हाल ही में ABC चैनल पर कहा कि वे “गोपनीय चर्चाओं” या “काल्पनिक सवालों” पर टिप्पणी नहीं करेंगे।

निष्कर्ष: ताइवान को लेकर ऑस्ट्रेलिया की नीति अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच फंसी हुई दिख रही है। एक तरफ अमेरिका से बढ़ता दबाव, दूसरी तरफ घरेलू राजनीति में विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया – यह सब प्रधानमंत्री अल्बनीज़ की चीन यात्रा को प्रभावित कर रहा है।