बोनस ब्याज को लेकर बड़े बैंकों पर आरोप, ‘जमा धोखे’ पर घिरे बैंक

बोनस ब्याज को लेकर बड़े बैंकों पर आरोप, ‘जमा धोखे’ पर घिरे बैंक

देश के चार बड़े बैंकों पर बचत खातों में दिए जाने वाले बोनस ब्याज दरों को लेकर भ्रामक दावे करने के आरोप लगे हैं। उपभोक्ता संगठनों और वित्तीय विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि बैंकों द्वारा प्रचारित ऊँची ब्याज दरें वास्तव में बहुत कम ग्राहकों को ही मिल पा रही हैं।

हाल ही में एक प्रमुख बैंक द्वारा यह स्वीकार किए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया है कि उसके अधिकांश ग्राहक घोषित बोनस ब्याज पाने की शर्तें पूरी नहीं कर पाते। इसके बाद अन्य बड़े बैंकों पर भी दबाव बढ़ गया है कि वे सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करें कि वास्तव में कितने खाताधारकों को पूरी ब्याज दर मिल रही है।

आरोप है कि बैंक विज्ञापनों में आकर्षक ब्याज दरों का प्रचार तो करते हैं, लेकिन उन्हें पाने के लिए इतनी जटिल शर्तें रखी जाती हैं—जैसे न्यूनतम मासिक जमा, सीमित निकासी, या अन्य खाते जोड़ना—कि आम ग्राहक उनसे अनजान रह जाता है।

उपभोक्ता अधिकार संगठनों का कहना है कि यह ‘जमा धोखा’ (Deposit Deception) है, जिससे ग्राहकों को यह गलतफहमी होती है कि उनकी बचत पर उन्हें अधिक रिटर्न मिलेगा, जबकि वास्तव में उन्हें सामान्य और कम ब्याज दर ही मिलती है।

वित्तीय नियामक संस्थाओं से मांग की जा रही है कि वे बैंकों को बाध्य करें कि वे साफ़-साफ़ यह बताएं:

  • कितने प्रतिशत ग्राहक बोनस ब्याज पा रहे हैं

  • बोनस ब्याज की शर्तें सरल भाषा में

  • वास्तविक और प्रभावी ब्याज दर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पारदर्शिता नहीं बढ़ाई गई, तो इससे बैंकिंग प्रणाली में आम लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।