एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ऑस्ट्रेलिया की बड़ी आबादी उन घरों में रह रही है जो उनकी ज़रूरत से कहीं ज़्यादा बड़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 60 फीसदी लोग अकेले या सिर्फ एक साथी के साथ रहते हैं, जबकि अधिकतर घरों में तीन या उससे ज़्यादा बेडरूम हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि बड़े घरों की चाहत के पीछे कई कारण हैं। वर्क फ्रॉम होम के चलते लोग अलग ऑफिस चाहते हैं, वहीं मेहमानों के लिए अतिरिक्त कमरा भी प्राथमिकता है।
नई कॉलोनियों में बने घरों में जिम, थिएटर और अन्य आधुनिक सुविधाएँ भी शामिल की जा रही हैं, जिससे घर और विशाल होते जा रहे हैं।
परिवार के सपनों और वास्तविकता के बीच का अंतर साफ नज़र आता है। ज़्यादातर लोग अपने मन में तीन या चार बेडरूम वाले घर की कल्पना करते हैं, लेकिन हक़ीक़त यह है कि अधिकांश घरों में दो से अधिक लोग रहते ही नहीं। यही असमानता देश में आवास संकट को और गहराती है।
रिपोर्ट बताती है कि देश के कुल मकानों में वन बेडरूम या स्टूडियो अपार्टमेंट की हिस्सेदारी सिर्फ 6 प्रतिशत है।
हालांकि हाल के वर्षों में यूनिट्स और छोटे अपार्टमेंट्स की संख्या बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे छोटे परिवारों के लिए कुछ विकल्प उपलब्ध हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अब ठोस कदम उठाने होंगे।
बड़े प्लॉट और विशाल मकानों पर कर ज़्यादा किया जाए।
छोटे घरों को सस्ता और आसानी से उपलब्ध कराया जाए।
घर बदलने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
रिपोर्ट के अनुसार, जब तक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक ज़रूरत और सपनों के बीच का यह असंतुलन बना रहेगा।