पुरुषों पर बाल देखभाल क्षेत्र में प्रतिबंध लगाने की मांग उठी, मेलबर्न मामला बना कारण

पुरुषों पर बाल देखभाल क्षेत्र में प्रतिबंध लगाने की मांग उठी, मेलबर्न मामला बना कारण

मेलबर्न में बाल देखभाल केंद्रों में कार्यरत एक पूर्व कर्मचारी जोशुआ ब्राउन पर यौन शोषण और बाल बलात्कार के गंभीर आरोप लगने के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया है। इस प्रकरण के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बाल देखभाल क्षेत्र में पुरुषों के कार्य करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

जोशुआ ब्राउन पर 70 से अधिक गंभीर आरोप लगाए गए हैं और मामला वर्तमान में अदालत में विचाराधीन है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने उन लगभग 1200 बच्चों के माता-पिता से अपील की है कि जिनका संपर्क ब्राउन द्वारा काम किए गए केंद्रों से रहा हो, वे अपने बच्चों की जांच कराएं।

पुलिस के अनुसार, ब्राउन ने मेलबर्न के लगभग 20 बाल देखभाल केंद्रों में वर्षों तक काम किया, हालांकि आरोप केवल एक केंद्र के आठ पीड़ित बच्चों से संबंधित हैं।

इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘इंडिपेंडेंट कलेक्टिव ऑफ सर्वाइवर्स’ की संस्थापक लुईस एडमंड्स ने 'टुडे' शो में कहा कि पुरुषों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना एक 'अत्यधिक कदम' होगा, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “हम सभी अच्छे पुरुषों को दोषी नहीं ठहरा सकते जो बच्चों के सकारात्मक रोल मॉडल बनना चाहते हैं, लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि हमारे सबसे कमजोर नागरिक – जो अक्सर अपनी बात नहीं कह सकते – उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।”

एडमंड्स ने सुझाव दिया कि बाल देखभाल केंद्रों में कुछ तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे "इंटिमेट केयर वेवर" यानी देखभाल की निजी प्रकृति के संबंध में अभिभावकों की सहमति लेना।

उन्होंने कहा, “हर बाल देखभाल केंद्र यह विकल्प दे सकता है कि क्या माता-पिता यह चाहेंगे कि उनके बच्चे की देखभाल में कोई पुरुष कर्मचारी शामिल हो या नहीं।”

ऑस्ट्रेलियन इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, बाल यौन अपराधियों में केवल 1.7% महिलाएं होती हैं, हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि ऐसे अपराध अक्सर रिपोर्ट नहीं होते, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता सीमित हो सकती है।

यह मामला न केवल बाल देखभाल में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर बहस छेड़ रहा है, बल्कि यह सवाल भी उठा रहा है कि क्या इस संवेदनशील क्षेत्र में पुरुषों की भूमिका पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

(नोट: जोशुआ ब्राउन का मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और उन्हें अभी तक दोषी सिद्ध नहीं किया गया है।)