कनाडा का बड़ा फैसला: जल्द करेगा फिलिस्तीन को मान्यता, ऑस्ट्रेलिया हुआ अलग-थलग

कनाडा का बड़ा फैसला: जल्द करेगा फिलिस्तीन को मान्यता, ऑस्ट्रेलिया हुआ अलग-थलग

"अब और देर की गुंजाइश नहीं है" — कनाडा का ऐलान

कनाडा ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए यह घोषणा की है कि वह जल्द ही संयुक्त राष्ट्र की आगामी बैठक में फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में आधिकारिक मान्यता देगा। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस ऐतिहासिक निर्णय में अब और देर करना अनुचित होगा।

ऑस्ट्रेलिया पड़ गया अलग-थलग

कनाडा के इस रुख के बाद अमेरिका, आयरलैंड, नॉर्वे और स्पेन जैसे देश पहले ही फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं, जिससे ऑस्ट्रेलिया अब अपने प्रमुख सहयोगियों के बीच अकेला नजर आने लगा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और मध्य-पूर्व नीति विश्लेषकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया पर अब दबाव और बढ़ेगा कि वह भी अपनी स्थिति पर पुनर्विचार करे।

कनाडा ने क्यों लिया यह फैसला?

कनाडा ने अपने बयान में यह कहा कि मध्य-पूर्व में लंबे समय से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए "दो राष्ट्र समाधान" ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है। फिलिस्तीन को मान्यता देना उसी दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री ट्रूडो ने अपने वक्तव्य में कहा,
"शांति तभी संभव है जब दोनों पक्षों को बराबरी की पहचान मिले। अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ठोस कदम उठाए।"

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

इस फैसले का व्यापक रूप से स्वागत किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के कई सदस्य देशों ने कनाडा के इस निर्णय को साहसी और समयानुकूल बताया है। वहीं, इज़रायल ने इस पर नाराजगी जाहिर की है और इसे शांति प्रक्रिया के लिए नुकसानदेह बताया है।

भारत की भूमिका पर उठे सवाल

भारत ने अभी तक फिलिस्तीन को पूरी तरह स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी है, लेकिन वह परंपरागत रूप से फिलिस्तीनी स्वायत्तता का समर्थन करता रहा है। कनाडा के इस ऐलान के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस मुद्दे पर अपनी नीति में कोई बदलाव करता है या नहीं।