नई दिल्ली, 25 जून 2025 |
चीन ने अपने अत्याधुनिक स्टील्थ मल्टीरोल फाइटर जेट J-35A को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कदम को चीन की रक्षा कूटनीति में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है, और यह भारत सहित उन सभी देशों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है जो पहले से ही क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को लेकर सतर्क हैं।
J-35A, जिसे पहले FC-31 या J-31 के नाम से जाना जाता था, एक ट्विन-इंजन स्टील्थ फाइटर है जिसे पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) के लिए विकसित किया गया था। यह विमान अत्याधुनिक रडार-चिकित्सा तकनीक, लो ऑब्ज़र्वेबिलिटी (कम रडार पर पकड़ में आना), मल्टीरोल क्षमताएं और लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमताओं से लैस है।
इसकी तुलना अमेरिका के F-35 लाइटनिंग-II और रूस के Su-57 से की जाती है, लेकिन चीन इसे कम कीमत और अधिक कूटनीतिक लाभों के साथ बाजार में उतारना चाहता है।
चीन के इस कदम से दक्षिण एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिकी देशों में सामरिक संतुलन बदल सकता है। खासकर यदि पाकिस्तान, ईरान, या चीन समर्थक अन्य देश इस विमान को खरीदते हैं, तो भारत के लिए सुरक्षा मोर्चे पर चुनौती और गहरी हो जाएगी।
भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में राफेल, सुखोई-30MKI और तेजस जैसे उन्नत विमान हैं, लेकिन यदि पड़ोसी देशों के पास भी स्टील्थ तकनीक से युक्त जेट आ जाते हैं, तो भारतीय हवाई सुरक्षा रणनीति को पूरी तरह से पुनः परिभाषित करना होगा।
चीन J-35A को सस्ती कीमत और तकनीकी सहयोग के वादे के साथ बेचने की योजना बना रहा है, जो विकासशील देशों को आकर्षित कर सकता है। यह अमेरिका के पारंपरिक रक्षा बाजार को चुनौती देने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन अपनी "मिलिट्री-डिप्लोमेसी" के तहत इस विमान को वैश्विक हथियारों के व्यापार में एक प्रमुख हथियार के रूप में देख रहा है।
निष्कर्ष:
J-35A की वैश्विक बिक्री भारत के लिए केवल तकनीकी या सामरिक चुनौती नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक चेतावनी भी है। आने वाले समय में भारत को अपने रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता, तकनीक और निर्यात रणनीति पर और ज़ोर देना होगा ताकि वह इस नई चुनौती का समुचित जवाब दे सके।