कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में चल रहे एक बेहद संवेदनशील जासूसी मामले की सुनवाई के दौरान चीनी दूतावास के अधिकारियों की मौजूदगी ने हलचल मचा दी है। इस केस की चर्चा केवल ऑस्ट्रेलिया में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है, क्योंकि यह मामला सीधे-सीधे राजनयिक रिश्तों और सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
मामले में आरोपित एक महिला ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया और सभी आरोपों से इनकार किया। उसने अपनी पहचान को गोपनीय बनाए रखने की मांग करते हुए ब्रूस लेहरमान के असफल रहे आपराधिक मुकदमे का हवाला दिया। उसका कहना है कि मीडिया और सार्वजनिक स्तर पर पहचान उजागर होने से उसके लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अदालत ने उसकी इस दलील पर विचार करते हुए पहचान उजागर न करने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में चीनी दूतावास के अधिकारी भी मौजूद थे। आमतौर पर स्थानीय अदालतों की कार्यवाही में विदेशी राजनयिकों का इस तरह शामिल होना असामान्य माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन की ओर से इस पूरे मामले पर नजदीकी नजर रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं ऑस्ट्रेलियाई मीडिया और कानूनी विशेषज्ञ इस उपस्थिति को एक तरह के “राजनयिक दबाव” के रूप में भी देख रहे हैं।
यह मुकदमा केवल एक आपराधिक केस नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन से उसके संबंधों पर भी असर डाल सकता है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच जासूसी और साइबर सुरक्षा को लेकर तनावपूर्ण हालात रहे हैं। ऐसे में अदालत में चीनी अधिकारियों की उपस्थिति को कई विश्लेषक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं।
अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई की तारीख तय की है। अभी तक मामले की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में यह मुकदमा केवल अदालत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑस्ट्रेलिया-चीन संबंधों में भी चर्चा का बड़ा मुद्दा बन सकता है।