नई दिल्ली।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इस बार आयोग ने पात्रता और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं, जिन्हें सिविल सेवा व्यवस्था में बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
यूपीएससी ने स्पष्ट किया है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) में पहले से कार्यरत अधिकारी अब सिविल सेवा परीक्षा 2026 में शामिल नहीं हो सकेंगे। आयोग का मानना है कि एक बार इन शीर्ष सेवाओं में नियुक्त होने के बाद दोबारा परीक्षा में बैठने की अनुमति देना प्रशासनिक स्थिरता के विपरीत है।
अधिसूचना के अनुसार, यदि कोई अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आईएएस या आईएफएस में नियुक्त हो जाता है, तो वह मुख्य परीक्षा में बैठने का पात्र नहीं रहेगा।
वहीं, मुख्य परीक्षा शुरू होने के बाद लेकिन परिणाम से पहले नियुक्ति होने की स्थिति में उस अभ्यर्थी का नाम किसी भी सेवा के लिए विचाराधीन नहीं रखा जाएगा।
यूपीएससी ने यह भी साफ किया है कि आईपीएस में पहले से चयनित उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा 2026 के माध्यम से उसी सेवा में पुनः चयन के पात्र नहीं होंगे।
हालांकि, आईपीएस या केंद्रीय सेवा समूह ‘ए’ में चयनित उम्मीदवारों को एक सीमित राहत दी गई है। यदि उन्हें प्रशिक्षण में शामिल होने से संबंधित अधिकारी द्वारा एक बार की छूट मिलती है, तो वे अगले वर्ष की परीक्षा में बैठ सकते हैं।
परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यूपीएससी ने परीक्षा केंद्रों पर सभी उम्मीदवारों के लिए चेहरा प्रमाणीकरण (फेस ऑथेंटिकेशन) अनिवार्य कर दिया है। इससे फर्जी अभ्यर्थियों पर रोक लगेगी और पहचान सत्यापन अधिक प्रभावी होगा।
आयोग के अनुसार, सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 24 मई 2026 को आयोजित की जाएगी।
साल 2026 के लिए यूपीएससी ने कुल 933 रिक्तियों की घोषणा की है, जिनमें विभिन्न अखिल भारतीय और केंद्रीय सेवाएं शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये नए नियम सिविल सेवाओं में बार-बार प्रयास कर सेवा बदलने की प्रवृत्ति पर रोक लगाएंगे। इससे प्रशासनिक ढांचे में स्थिरता आएगी और गंभीर व नए अभ्यर्थियों को बेहतर अवसर मिलेंगे।
यूपीएससी ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि आवेदन करने से पहले अधिसूचना को ध्यानपूर्वक पढ़ें और पात्रता से जुड़े सभी नियमों को अच्छी तरह समझ लें।