बॉन्डी हमले के बाद लाए गए कानूनों का विरोध ‘पाखंड नहीं’: लिबरल सीनेटर

बॉन्डी हमले के बाद लाए गए कानूनों का विरोध ‘पाखंड नहीं’: लिबरल सीनेटर

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की विपक्षी गठबंधन सरकार (कोएलिशन) पर बॉन्डी आतंकी हमले के बाद खुद द्वारा माँगे गए कड़े कानूनों का विरोध करने को लेकर लग रहे ‘पाखंड’ के आरोपों को लिबरल पार्टी के सीनेटर डेव शर्मा ने खारिज किया है। उनका कहना है कि कोएलिशन का रुख सिद्धांतों पर आधारित है, न कि राजनीतिक दोहरेपन पर।

स्काई न्यूज़ से बातचीत में सीनेटर शर्मा ने कहा कि असल पाखंड प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ का है, जिन्होंने पहले बॉन्डी हमले की जाँच के लिए रॉयल कमीशन और संसद के विशेष सत्र की आवश्यकता से इनकार किया, लेकिन बाद में जन दबाव में अपना रुख बदलना पड़ा।

उन्होंने आरोप लगाया कि बॉन्डी में हुए ‘आईएसआईएस-प्रेरित’ आतंकी हमले के बाद विपक्ष ने सरकार के साथ मिलकर यहूदी विरोधी हिंसा और सामुदायिक सुरक्षा से जुड़े कानूनों पर रचनात्मक सहयोग की कोशिश की, लेकिन सरकार ने बार-बार टालमटोल और राजनीतिक दांव-पेंच अपनाए।

सरकार को झुकना पड़ा, विधेयक किया गया विभाजित

प्रधानमंत्री अल्बानीज़ को अंततः संसद में पेश किए गए व्यापक (ओम्निबस) विधेयक को विभाजित करना पड़ा। सरकार ने हथियारों और सीमा शुल्क से जुड़े कानूनों को अलग कर दिया, जबकि नस्लीय घृणा (रेशियल विलिफिकेशन) से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों को फिलहाल वापस ले लिया गया।

प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि संसद में जिन उपायों को समर्थन नहीं मिलेगा, उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। यह फैसला तब आया जब ग्रीन्स और कोएलिशन – दोनों ने विधेयक के मौजूदा स्वरूप को अस्वीकार कर दिया।

संसद का विशेष सत्र, पीड़ितों को श्रद्धांजलि

बॉन्डी हमले में मारे गए 15 निर्दोष लोगों की याद में संसद को निर्धारित समय से पहले बुलाया गया है। सोमवार को संसद के दोनों सदनों में शोक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें पीड़ित परिवारों की उपस्थिति में सांसदों ने श्रद्धांजलि दी। सरकार ने इस दिन को ‘राष्ट्रीय उपचार और एकजुटता’ का प्रतीक बताया।

हालाँकि सोमवार को विधेयकों पर औपचारिक बहस नहीं हुई, लेकिन मंगलवार को मतदान से पहले पर्दे के पीछे बातचीत जारी रही।

यहूदी संगठनों की नाराज़गी

कोएलिशन के रुख से यहूदी समुदाय के कुछ प्रमुख संगठनों, जिनमें एग्ज़ीक्यूटिव काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलियन ज्यूरी भी शामिल है, ने निराशा जताई है। उनका मानना है कि यहूदी विरोधी हिंसा से निपटने के लिए सख्त और स्पष्ट कानूनों की आवश्यकता है।

जनमत सर्वे: वन नेशन आगे

इसी बीच, नए न्यूज़पोल सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। पहली बार पॉपुलिस्ट पार्टी ‘वन नेशन’ की प्राथमिक वोट हिस्सेदारी 22 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जबकि कोएलिशन 21 प्रतिशत के साथ रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है। लेबर पार्टी को 32 प्रतिशत समर्थन मिला है।

वन नेशन के नेता बार्नबी जॉयस ने कहा कि जनता का पारंपरिक बड़ी पार्टियों से मोहभंग होना उन्हें आश्चर्यजनक नहीं लगता।