सड़क उपयोग शुल्क पर बनी सहमति, ईवी मालिकों को लगेगा झटका

सड़क उपयोग शुल्क पर बनी सहमति, ईवी मालिकों को लगेगा झटका

कैनबरा में आयोजित तीन दिवसीय आर्थिक गोलमेज बैठक से लौटकर संघीय कोषाध्यक्ष जिम चाल्मर्स ने गुरुवार रात घोषणा की कि अब देश में रोड यूज़र चार्ज (Road User Charge) लागू करने पर व्यापक सहमति बन चुकी है। यह नया टैक्स मौजूदा पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले एक्साइज टैक्स की जगह लेगा और शुरुआत इलेक्ट्रिक गाड़ियों से होगी।

शुरुआत ईवी और ट्रकों से

चाल्मर्स ने बताया कि इस टैक्स को पहले ट्रकों पर परीक्षण के तौर पर लागू किया जाएगा और बाद में कारों तक बढ़ाया जाएगा। इसका मॉडल न्यू साउथ वेल्स की योजना पर आधारित होगा। अनुमान है कि यह टैक्स गाड़ी की माइलेज के आधार पर सालाना 300 से 400 डॉलर तक हो सकता है।

क्यों जरूरी है नया टैक्स?

फिलहाल पेट्रोल और डीजल वाहनों से प्रति लीटर 51.6 सेंट एक्साइज टैक्स लिया जाता है। औसत परिवार साल भर में लगभग 1200 डॉलर टैक्स चुकाता है। लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियां कोई योगदान नहीं करतीं। चाल्मर्स ने कहा,
“अगले 10-20 साल में मौजूदा व्यवस्था टिकाऊ नहीं रहेगी। जैसे-जैसे लोग पेट्रोल गाड़ियों से ईवी पर जाएंगे, हमें सड़कों में निवेश के लिए नया स्रोत चाहिए।”

राज्यों के साथ बैठक 5 सितंबर को

चाल्मर्स ने ऐलान किया कि 5 सितंबर को राज्यों के खजांची इस विषय पर विस्तृत विकल्प पत्र पर चर्चा करेंगे। इस टैक्स का उद्देश्य सड़क निर्माण व रखरखाव के लिए स्थायी फंडिंग का प्रावधान करना है।

निवेश और टैक्स सुधार पर फोकस

बैठक में कर सुधार पर भी व्यापक चर्चा हुई। चाल्मर्स ने बताया कि तीन प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी:

  1. समान अवसर और पीढ़ीगत न्याय

  2. व्यवसाय निवेश को प्रोत्साहन

  3. सरल और टिकाऊ टैक्स सिस्टम, जिससे उम्रदराज़ आबादी व अन्य दबावों को देखते हुए सेवाओं की फंडिंग सुनिश्चित हो सके।

विरोध और चुनौतियां

  • विक्टोरिया का ईवी टैक्स हाई कोर्ट में असंवैधानिक ठहराकर रद्द कर दिया गया था।

  • दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की योजना भी जनता के विरोध के कारण वापस लेनी पड़ी।

  • केवल न्यू साउथ वेल्स ने 2027 से लागू करने की ठोस योजना बनाई है।

ऑटोमोबाइल संघ का रुख

ऑस्ट्रेलियन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) ने दूरी-आधारित टैक्स का समर्थन किया है, लेकिन शर्त रखी है कि इस टैक्स से होने वाली कमाई सीधे सड़क सुधार में ही खर्च हो।


👉 साफ है कि आने वाले वर्षों में ईवी मालिकों की मुफ्त सवारी खत्म होने जा रही है। सरकार का लक्ष्य पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटने के साथ सड़क फंडिंग का स्थायी हल खोजना है।