ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष के नेता डेविड क्रिसाफुल्ली (David Crisafulli) पर आरोप है कि वे अपनी पार्टी लिबरल नेशनल पार्टी (LNP) के लिए चंदा जुटाने के नाम पर उद्योगपतियों और कंपनियों से भारी रकम ले रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एलएनपी द्वारा आयोजित एक विशेष फंडरेज़र में खनन कंपनियों, पब मालिकों, बोटॉक्स क्लीनिकों और वर्कर्स कम्पेन्सेशन बीमा कंपनियों को मौका दिया गया है कि वे क्रिसाफुल्ली और उनके मंत्रियों से सिर्फ 15 मिनट की मीटिंग के बदले 8,800 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 5.3 लाख रुपये) अदा करें।
इस आयोजन को लेकर राजनीतिक हलकों में “एक्सेस पॉलिटिक्स” (Access Politics) यानी पैसे देकर नेताओं तक पहुंच बनाने की संस्कृति पर गहरे सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी पार्टियों और नागरिक संगठनों का कहना है कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे साफ़ हो जाता है कि उद्योगपति और कॉर्पोरेट घराने किस तरह से नीतिगत फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
कई सामाजिक संगठनों ने इस कदम को “जनता से विश्वासघात” बताया है। उनका कहना है कि आम लोग अपने चुने हुए नेताओं तक मुश्किल से पहुंच पाते हैं, जबकि पैसे वाले उद्योगपति चंद मिनटों के लिए मोटी रकम देकर सीधे नीति-निर्माताओं से बातचीत कर सकते हैं।
हालांकि, पार्टी समर्थकों का कहना है कि फंडरेज़र किसी भी राजनीतिक दल के लिए आम बात है और यह पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है।
यह विवाद ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में पैसा बनाम लोकतंत्र की बहस को और गहरा करता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा बन सकता है।