नई दिल्ली, 29 जून 2025
भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर इन दिनों हलचल तेज हो गई है। खासतौर पर नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बैठकों का दौर जारी है, लेकिन नाम तय करने में गतिरोध बना हुआ है।
बीजेपी का संगठनात्मक ढांचा संघ के सहयोग से ही तैयार होता है और पार्टी के बड़े निर्णयों में संघ की भूमिका अहम मानी जाती है। लेकिन इस बार जिस नाम को लेकर पार्टी आलाकमान विचार कर रहा है, उस पर संघ की ओर से अब तक अंतिम सहमति नहीं दी गई है। यही वजह है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा में देरी हो रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव के साथ-साथ कई राज्यों में भी प्रदेश अध्यक्षों को बदले जाने की योजना है। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। पार्टी इन राज्यों में 2026 और 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करना चाहती है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों की चर्चा हो रही है, उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री, संगठन के अनुभवी नेता और संघ से जुड़े व्यक्तित्व शामिल हैं। हालांकि अंतिम मुहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की सहमति से ही लगेगी। संघ की सहमति के बिना यह फैसला आगे नहीं बढ़ सकता।
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद पार्टी का लक्ष्य आगामी राज्यों के चुनावों पर केंद्रित है। संगठन में बदलाव कर पार्टी एक नया संतुलन बनाना चाहती है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रहे और आगामी चुनावों में पार्टी की स्थिति और मजबूत हो।
बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की यह प्रक्रिया संकेत दे रही है कि पार्टी नेतृत्व अब 2029 तक की रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि संघ और पार्टी के बीच सहमति बनते ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो सकती है। तब तक दोनों पक्षों के बीच विचार-विमर्श जारी रहेगा।