नई दिल्ली – दिल्ली सरकार ने राजधानी में पुराने वाहनों पर लगाए गए ईंधन रोक के आदेश को लागू होने के महज तीन दिन के भीतर ही अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे लाखों वाहन मालिकों को कुछ राहत मिली है। इस फैसले को लेकर सियासी और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
दरअसल, CAQM (Commission for Air Quality Management) के निर्देशों के तहत 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर सख्त कार्रवाई की योजना थी। इसके तहत 1 जुलाई से दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर ऐसे पुराने वाहनों को ईंधन देने से मना कर दिया गया था। लेकिन अब, सरकार ने इस आदेश को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया है।
दिल्ली की पर्यावरण मंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि जनता की समस्याओं और विभिन्न हितधारकों से मिले फीडबैक के आधार पर यह निर्णय लिया गया है।
सरकार ने CAQM को पत्र लिखकर इस आदेश पर रोक लगाने की सिफारिश की है, ताकि इस बीच सभी पक्षों से बातचीत करके एक संतुलित समाधान निकाला जा सके।
रेखा गुप्ता ने कहा,
"हमें जनता की तकलीफों का अहसास है। हमारी प्राथमिकता प्रदूषण नियंत्रण है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि किसी भी निर्णय से आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।"
इस आदेश के बाद दिल्ली के कई इलाकों में अफरातफरी मच गई थी। पुराने वाहनों के मालिकों को ईंधन नहीं मिलने से वे सड़कों पर भटकते दिखे। कई लोग अपनी आजीविका छिन जाने की आशंका जताने लगे थे, क्योंकि ऑटो, टैक्सी और मालवाहक वाहनों में बड़ी संख्या में ऐसे पुराने वाहन शामिल हैं।
विपक्ष ने भी इस फैसले को "जन विरोधी" बताते हुए सरकार की आलोचना की और कहा कि यह फैसला बिना किसी तैयारी के लागू किया गया।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि नए आदेश आने तक पुराने वाहनों को फिलहाल ईंधन मिलना जारी रहेगा, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमों को भविष्य में सख्ती से लागू किया जाएगा।