बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के बाद अब उनकी आठ साल पुरानी वसीयत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति अपने किसी भी बच्चे—सनी देओल, बॉबी देओल, ईशा, अहाना, अजीता या विजेता—को नहीं दी, बल्कि इसे अपने चाचा के पोतों (भतीजों) के नाम कर दिया था।
धर्मेंद्र का पैतृक गाँव डांगो (जिला लुधियाना) में स्थित है, जहाँ उन्होंने अपने बचपन के तीन कीमती साल बिताए थे। गाँव में बना उनका कच्चा-मिट्टी का पुराना घर आज करोड़ों की कीमत का है, लेकिन धर्मेंद्र के लिए यह धन का नहीं, बल्कि भावनाओं और जड़ों का प्रतीक रहा है।
फ़िल्मी दुनिया में कामयाबी की ऊँचाइयों को छूने के बावजूद उन्होंने पंजाब की उस मिट्टी से रिश्ता कभी नहीं तोड़ा। गाँव की जमीन और घर की देखभाल वर्षों से उनके भतीजे ही कर रहे थे, जो अब भी वहीं रहते हैं।
परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र जानते थे कि उनके बेटे-बेटियाँ मुंबई और विदेशों में अपने काम में व्यस्त रहते हैं और पैतृक संपत्ति की देखरेख उनके लिए संभव नहीं होगी।
इसके विपरीत, उनके चाचा के पोते वर्षों से उसी इलाके में रहकर खेती-बाड़ी और घर की देखभाल करते आए हैं। जिम्मेदारी और पारिवारिक परंपरा का सम्मान करते हुए धर्मेंद्र ने लगभग 8–10 साल पहले ही यह संपत्ति उन्हें उपहार (Gift Deed) के रूप में सौंप दी थी।
करीब 2.5 एकड़ में फैली यह जमीन लगभग 5 करोड़ रुपये की बताई जाती है। जिन भतीजों को यह सौंपा गया, उनमें बूटा सिंह भी शामिल हैं, जो आज भी लुधियाना के एक टेक्सटाइल मिल में काम करते हैं।
धर्मेंद्र के करीबी बताते हैं कि वे हमेशा परिवार को सबसे ऊपर रखते थे। पैतृक संपत्ति के नामांकन में भी उन्होंने वही किया जो उन्हें उचित लगा—परिवार की परंपरा और ज़िम्मेदारी निभाने वालों को सम्मान देना।
24 नवम्बर को 89 वर्ष की आयु में धर्मेंद्र के निधन के बाद अब उनकी यह वसीयत फिर सुर्खियों में है, जो दर्शाती है कि उनके लिए “जड़ें” और “रिश्ते” आज भी उतने ही अहम थे, जितने उनके लिए बड़े पर्दे पर निभाए किरदार।