तेहरान, 28 जून 2025:
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इज़राइल के साथ छिड़े संघर्ष के बीच, ईरान की आंतरिक राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई, जो दशकों से ईरान की राजनीति और धार्मिक नेतृत्व के केंद्र में रहे हैं, अब धीरे-धीरे हाशिये पर जाते दिख रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, हालिया युद्धविराम के निर्णय में न तो खामेनेई की सार्वजनिक सहमति सामने आई और न ही उनकी कोई अहम भूमिका। इसके बजाय, ईरान के राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने मिलकर युद्धविराम की घोषणा की, जो इस बात का संकेत है कि देश की निर्णायक शक्तियाँ अब दूसरे हाथों में सौंपी जा रही हैं।
84 वर्षीय खामेनेई की सेहत को लेकर अटकलें लंबे समय से लगाई जा रही थीं, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से उनकी सार्वजनिक उपस्थिति में आई भारी कमी और सत्ता से दूरी इन आशंकाओं को और पुख्ता करती है। खबरें यह भी हैं कि उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन ईरान की सरकार इस पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम सिर्फ एक तात्कालिक बदलाव नहीं, बल्कि सत्ता के केंद्र में परिवर्तन की शुरुआत हो सकती है। ईरान के राष्ट्रपति सैयद जलाली और सुरक्षा परिषद के अन्य कट्टरपंथी नेताओं ने जिस तरह से युद्धविराम का निर्णय लिया, वह इस ओर इशारा करता है कि खामेनेई की अनुपस्थिति में नई पीढ़ी के नेता सक्रिय हो चुके हैं।
देश के अंदर भी खामेनेई की नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा था। आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से परेशान जनता में आक्रोश था। वहीं युवा वर्ग बार-बार पारदर्शिता और बदलाव की मांग करता रहा है। इन सब कारणों ने भी शायद ईरान की सत्ता संरचना को झकझोर कर रख दिया है।
अब सवाल यह है कि क्या आयतुल्ला खामेनेई खुद को दोबारा सत्ता के केंद्र में स्थापित कर पाएंगे, या फिर यह ईरान में एक नए युग की शुरुआत है? क्या कट्टर धार्मिक नेतृत्व के बजाय राजनीतिक निर्णय अब अधिक व्यावहारिक और रणनीतिक सोच वाले नेताओं द्वारा लिए जाएंगे?
इन सभी सवालों का उत्तर आने वाले दिनों में मिल सकता है, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि ईरान की सत्ता संरचना में एक मौन क्रांति की शुरुआत हो चुकी है।