पुतिन से मिले डोभाल: ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच रूस-भारत ने दिखाई रणनीतिक एकजुटता

पुतिन से मिले डोभाल: ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच रूस-भारत ने दिखाई रणनीतिक एकजुटता

मॉस्को, 8 अगस्त 2025 — वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव और अमेरिका के व्यापारिक दबावों के बीच, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने रूस की राजधानी मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और रूस के सुरक्षा परिषद सचिव सर्गेई शोइगू से अहम मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय पर हुई, जब अमेरिका ने भारत के खिलाफ टैरिफ में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर, रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर चेतावनी दी है।

बैठक का महत्व

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की थी कि भारत से आने वाले कुछ प्रमुख निर्यात उत्पादों पर टैरिफ 50% तक बढ़ाया जाएगा। इसका सीधा संदेश था कि वॉशिंगटन रूस-भारत ऊर्जा व्यापार को लेकर सख्त रुख अपनाना चाहता है।
इन हालात में, डोभाल की मॉस्को यात्रा ने यह संकेत दिया कि भारत किसी एक धुरी के बजाय बहुध्रुवीय और स्वतंत्र विदेश नीति के रास्ते पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है।

रूस का संदेश: नई विश्व व्यवस्था की रूपरेखा

बैठक के बाद रूस के सुरक्षा परिषद सचिव सर्गेई शोइगू ने कहा,

“भारत और रूस मिलकर एक अधिक न्यायपूर्ण, संतुलित और टिकाऊ विश्व व्यवस्था बनाने के पक्षधर हैं। हमारा उद्देश्य है कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन सर्वोपरि हो और वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक समाधान खोजा जाए।”

शोइगू ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस भारत को अपनी शीर्ष प्राथमिकता वाले साझेदारों में मानता है और आने वाले वर्षों में ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग और गहरा किया जाएगा।

भारत का रुख: रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर

अजीत डोभाल ने बातचीत के दौरान भारत के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि नई दिल्ली अपनी ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक हितों के मामले में किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
बैठक में राष्ट्रपति पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा पर भी चर्चा हुई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों के अगले पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

ऊर्जा सहयोग केंद्र में

रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की आपूर्ति पिछले दो वर्षों में भारत के ऊर्जा आयात में अहम हिस्सा बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ धमकियों के बावजूद, भारत इस साझेदारी को बनाए रखने के पक्ष में है क्योंकि यह आर्थिक रूप से लाभकारी और रणनीतिक रूप से आवश्यक है।

भविष्य की दिशा

इस मुलाकात के बाद यह साफ हो गया है कि भारत और रूस दोनों, अमेरिकी दबाव के बावजूद, अपने रिश्तों को और मजबूत करने के लिए तैयार हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यह मुलाकात आने वाले महीनों में वैश्विक शक्ति समीकरण में भारत की भूमिका को और स्पष्ट करेगी, खासकर जब दुनिया ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी साझेदारी और भू-राजनीतिक संतुलन जैसे मुद्दों से जूझ रही है।