सिडनी/मेलबर्न—सैकड़ों यहूदी कलाकारों और सांस्कृतिक कर्मियों ने सार्वजनिक बयान जारी कर उस जनआक्रोश की आलोचना की है, जिसमें एक साहित्यिक उत्सव से हटाई गई लेखिका Randa Abdel-Fattah को ‘नायक’ के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इन रचनाकारों का कहना है कि उन्हें डॉक्सिंग (व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक कर निशाना बनाने) के चलते नौकरियां गंवानी पड़ीं, लेकिन उनके अनुसार समर्थकों ने उन घटनाओं में लेखिका की भूमिका पर आंखें मूंद लीं।
पीड़ित कलाकारों का दावा है कि बीते महीनों में सोशल मीडिया अभियानों के दौरान उनकी पहचान, कार्यस्थल और निजी विवरण फैलाए गए, जिसके परिणामस्वरूप कई संस्थानों ने सुरक्षा कारणों से अनुबंध रद्द कर दिए। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर डर और चुप्पी का माहौल बनाया।
संयुक्त बयान में कहा गया, “किसी लेखक को मंच से हटाए जाने पर बहस होनी चाहिए, लेकिन यह बहस अधूरी है जब डॉक्सिंग से प्रभावित लोगों की पीड़ा और जवाबदेही की बात ही न की जाए।” बयान में यह भी जोड़ा गया कि सार्वजनिक विमर्श में चयनात्मक सहानुभूति से समुदायों के बीच खाई और गहरी होती है।
उधर, लेखिका के समर्थकों का तर्क है कि उत्सव से हटाया जाना विचारों के कारण हुआ और यह सेंसरशिप का उदाहरण है। वे इसे अकादमिक स्वतंत्रता पर हमला बताते हैं। आयोजकों ने पहले ही स्पष्ट किया था कि कार्यक्रमों के लिए सुरक्षा जोखिमों और समुदायों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।
विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि क्या संस्थान विरोधाभासी मतों के बीच संतुलन साध पा रहे हैं, और क्या ऑनलाइन अभियानों की सीमाएं तय होनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्सिंग किसी भी पक्ष से हो, वह अस्वीकार्य है और इसके दुष्परिणाम वास्तविक जीवन में सामने आते हैं—खासतौर पर रोजगार और मानसिक स्वास्थ्य पर।
पीड़ित कलाकारों ने मांग की है कि उत्सव आयोजक और सांस्कृतिक संस्थान स्पष्ट दिशानिर्देश अपनाएं, ताकि आलोचना और असहमति सुरक्षित दायरे में रह सके। साथ ही, उन्होंने मीडिया और समर्थक समूहों से अपील की है कि वे सभी प्रभावित पक्षों की आवाज़ सुनें, न कि किसी एक नैरेटिव को ‘हीरो’ बनाकर पेश करें।
यह विवाद ऑस्ट्रेलिया के सांस्कृतिक परिदृश्य में अभिव्यक्ति, जिम्मेदारी और ऑनलाइन सुरक्षा पर चल रही व्यापक बहस को और तेज करता है।