मुंबई में 15 जुलाई को खुलेगा भारत का पहला टेस्ला शोरूम, लेकिन क्या आप जानते हैं इस कंपनी के पीछे की असली कहानी?
जिस कंपनी को आज दुनिया एलन मस्क के नाम से जानती है, उसकी शुरुआत मस्क ने नहीं की थी। टेस्ला की नींव 1 जुलाई 2003 को दो इंजीनियर्स — मार्टिन एबरहार्ड और मार्क टारपेनिंग — ने रखी थी। दोनों का उद्देश्य था एक ऐसी इलेक्ट्रिक कार बनाना जो न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर हो, बल्कि स्टाइलिश और हाई-परफॉर्मेंस भी हो।
2004 में मस्क ने टेस्ला में 6.5 मिलियन डॉलर का निवेश कर सीरीज A फंडिंग के जरिए कंपनी में प्रवेश किया। जल्द ही वह चेयरमैन बने और धीरे-धीरे कंपनी के हर महत्वपूर्ण फैसले में हस्तक्षेप करने लगे।
2008 में जब कंपनी आर्थिक संकट से गुजर रही थी, मस्क ने CEO का पद संभालकर उसे नया जीवन दिया। बाद में उन्होंने खुद को को-फाउंडर भी घोषित कर लिया। इस पर एबरहार्ड ने मस्क के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी किया, परंतु 2009 में कोर्ट का फैसला मस्क के पक्ष में गया।
2008 में लॉन्च हुई टेस्ला रोडस्टर — एक हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स इलेक्ट्रिक कार जिसने EV इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया। यह 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार महज 3.9 सेकंड में पकड़ती थी और एक बार चार्ज पर 320 किमी चलती थी।
मस्क ने 2018 में अपनी व्यक्तिगत रोडस्टर को स्पेसएक्स रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेज दिया, जो आज भी पृथ्वी की कक्षा में घूम रही है।
मस्क ने टेस्ला के मॉडल्स के लिए ‘S3XY’ नाम की रणनीति बनाई:
Model S (2012) – एक लग्जरी सेडान
Model X (2015) – फैमिली SUV फाल्कन विंग डोर्स के साथ
Model 3 (2017) – मिडल क्लास को टेस्ला तक लाने वाली पहली किफायती EV
Model Y (2020) – एक कॉम्पैक्ट SUV, जो तेजी से पॉपुलर हुई
टेस्ला को केवल कार कंपनी कहना अब गलत होगा। यह एक AI-संचालित टेक्नोलॉजी कंपनी बन चुकी है। इसमें ऑटो-पायलट, सेल्फ-ड्राइविंग क्षमताएं और ओवर-द-एयर सॉफ्टवेयर अपडेट्स जैसी तकनीकें हैं जो इसे अन्य कार ब्रांड्स से अलग बनाती हैं।
2016 में टेस्ला ने सोलर सिटी का अधिग्रहण किया और क्लीन एनर्जी प्रोडक्ट्स जैसे सोलर रूफ, पावरऑल और पावरपैक लाना शुरू किया। इसके बाद चीन में शंघाई गीगाफैक्टरी, जर्मनी में गिगा बर्लिन और अमेरिका में गिगा टेक्सास की स्थापना की गई।
शंघाई की गीगाफैक्टरी इतनी विशाल है कि उसमें 100 फुटबॉल स्टेडियम समा सकते हैं।
अब मस्क एक नई Roadster लाने की योजना बना रहे हैं जो 1.9 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकेगी। इसमें रॉकेट थ्रस्ट टेक्नोलॉजी देने की भी बात कही जा रही है।
अब भारत भी टेस्ला की ग्लोबल जर्नी का हिस्सा बनने जा रहा है। 15 जुलाई 2025 को मुंबई के बीकेसी में भारत का पहला टेस्ला शोरूम खुलेगा। इसके साथ ही टेस्ला भारतीय ग्राहकों के लिए हकीकत बनने जा रही है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत में टेस्ला की पहली कार किसके नाम होगी।