देश में बढ़ते ईंधन संकट के बीच प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय कैबिनेट की बैठक बुलाई है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित रणनीति बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक में “हल्के लेकिन प्रभावी” उपायों पर चर्चा हो रही है, जिनका उद्देश्य बिना सख्त प्रतिबंध लगाए ईंधन की खपत को कम करना है। सरकार चाहती है कि पूरे देश में एक समान संदेश दिया जाए, ताकि लोगों में भ्रम की स्थिति न बने।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक बाजार में अस्थिरता, आपूर्ति में बाधाएं और घरेलू भंडार पर दबाव के कारण ईंधन संकट गहराता जा रहा है। हालांकि अभी तक राशनिंग जैसे कड़े कदमों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन यदि स्थिति बिगड़ती है तो ऐसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
चर्चा में जिन उपायों पर विचार हो रहा है, उनमें गैर-जरूरी यात्रा कम करना, कारपूलिंग को बढ़ावा देना, सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग और कंपनियों को लचीली कार्य व्यवस्था अपनाने की सलाह देना शामिल है। इसके अलावा, माल ढुलाई को अधिक कुशल बनाने के तरीकों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि ईंधन की बचत हो सके।
प्रधानमंत्री इस संकट को “साझा जिम्मेदारी” के रूप में प्रस्तुत करने पर जोर दे रहे हैं, ताकि लोग स्वेच्छा से इन उपायों को अपनाएं। सरकार का मानना है कि जनता के सहयोग से ही इन कदमों की सफलता सुनिश्चित होगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि स्वैच्छिक उपाय अल्पकाल में मददगार हो सकते हैं, लेकिन उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लोग कितनी गंभीरता से इनका पालन करते हैं।
बैठक के बाद सरकार द्वारा एक आधिकारिक बयान जारी किए जाने की उम्मीद है, जिसमें तय किए गए कदमों की जानकारी दी जाएगी और लोगों को आश्वस्त करने का प्रयास किया जाएगा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है।