रोप में जलवायु संकट गहराया:
गर्मी से बेहाल यूरोप इन दिनों भीषण ताप लहर की चपेट में है। इतिहास में पहली बार कई प्रमुख देशों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। स्पेन, फ्रांस और इटली जैसे देशों में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
स्पेन के दक्षिणी क्षेत्र ह्यूएलवा में तापमान ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 46°C तक का आंकड़ा छू लिया है, जो कि 1950 के बाद जून में अब तक का सबसे अधिक तापमान है।
बार्सिलोना की फैबरा वेधशाला के अनुसार, जून 2025 में औसत तापमान 26°C दर्ज किया गया, जो पिछले 100 वर्षों में सर्वाधिक है। 30 जून को यहां दिन का अधिकतम तापमान 37.9°C रहा।
पेरिस में पारा 40°C तक पहुंचने के बाद सरकार को कड़े कदम उठाने पड़े। 1,000 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए और एफिल टॉवर के टॉप डेक को पर्यटकों के लिए अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
मेटियो फ्रांस ने बताया कि देश के 16 विभागों को "रेड अलर्ट" पर रखा गया है जबकि अन्य 68 क्षेत्र भी हाई अलर्ट पर हैं।
इटली ने मिलान, रोम सहित 17 शहरों में हीटवेव रेड अलर्ट जारी किया है। सिसिली के बाघेरिया शहर में हीट स्ट्रोक और हार्ट अटैक से एक महिला की मृत्यु हो गई।
सरकार ने सबसे गर्म घंटों के दौरान बाहरी कामों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
कोपरनिकस क्लाइमेट सर्विस के मुताबिक, यूरोप दुनिया का सबसे तेज़ी से गर्म होता महाद्वीप बन चुका है। यहां तापमान वृद्धि की दर वैश्विक औसत से दोगुनी है।
हीटवेव का यह कहर वर्ष की शुरुआत से शुरू हो गया है और विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी महीनों में हालात और खराब हो सकते हैं।
स्वास्थ्य एजेंसियों ने नागरिकों को धूप से बचाव, भरपूर पानी पीने और अत्यधिक गर्मी में बाहर न निकलने की सलाह दी है। जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मानव-जनित ग्लोबल वार्मिंग का गंभीर संकेत है और तत्काल वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता है।
🗞️ निष्कर्ष:
जहाँ भारत के लिए यह तापमान सामान्य लग सकता है, वहीं यूरोप के लिए यह खतरे की घंटी है। इन हालातों ने एक बार फिर वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर चिंतन को मजबूर कर दिया है।