वॉशिंगटन, 5 सितंबर 2025
अमेरिका और भारत के बीच व्यापार वार्ता एक बार फिर गतिरोध में फंस गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और गहरा कर दिया है। इस बीच, जो बाइडेन सरकार के समय के शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने ट्रंप को आगाह किया है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो अमेरिका एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार को खो सकता है।
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन और पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने फॉरेन अफेयर्स पत्रिका में संयुक्त संपादकीय लिखते हुए कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों ने पिछले एक दशक में अभूतपूर्व प्रगति की है। इस साझेदारी ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की "खतरनाक महत्वाकांक्षाओं" को रोकने में अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रंप की “थियेट्रिक्स” अक्सर सौदेबाजी की भूमिका तैयार करने का तरीका होती है। लेकिन यदि मौजूदा तनाव जारी रहा तो यह न केवल व्यापारिक रिश्तों को नुकसान पहुंचाएगा बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी अमेरिका को भारी पड़ सकता है।
सुलिवन और कैंपबेल ने माना कि टैरिफ, रूस से भारत की तेल खरीदारी और पाकिस्तान को लेकर फिर से बढ़ा तनाव—इन सभी ने संबंधों को तेजी से बिगाड़ा है। उन्होंने कहा, “यह याद रखना ज़रूरी है कि पिछले एक पीढ़ी में भारत क्यों अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार बनकर उभरा।”
पूर्व अधिकारियों का मानना है कि यदि अमेरिका भारत के साथ संबंधों में दरार आने देता है तो यह सीधे-सीधे चीन के लिए अवसर बन जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि “अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो वाशिंगटन अपनी नवाचार और सामरिक बढ़त बीजिंग के हाथों गंवा सकता है।”
भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में खटास नई नहीं है, लेकिन इस बार टकराव का स्तर अधिक गंभीर माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या दोनों देश आपसी मतभेद दूर कर साझेदारी को पुनर्जीवित कर पाएंगे या फिर यह तनाव आने वाले वर्षों में नई दिशा तय करेगा।