पटना, 13 जुलाई 2025 – बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी Systematic Investigation Report (SIR) के अनुसार, राज्य की मतदाता सूची में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के नागरिकों के नाम भी दर्ज पाए गए हैं। इस रिपोर्ट ने सुरक्षा एजेंसियों और चुनावी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनाव आयोग की जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक 80 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं का सत्यापन पूरा कर लिया गया है, और इस प्रक्रिया में कई ऐसे लोगों की पहचान हुई है जो भारत के नागरिक नहीं हैं, लेकिन किसी न किसी माध्यम से वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराने में सफल रहे।
रिपोर्ट के अनुसार, सीमावर्ती जिलों जैसे किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और पश्चिम चंपारण में ये मामले सबसे ज्यादा पाए गए हैं। यहां पर रहने वाले कुछ स्थानीय एजेंटों और दस्तावेज़ तैयार करने वाले दलालों की मदद से फर्जी पहचान पत्र और पते के प्रमाण पत्र तैयार कराए गए, जिससे विदेशी नागरिकों को भारतीय मतदाता के रूप में दर्ज किया जा सका।
चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच तेज़ी से जारी है और संबंधित जिलों में विशेष अभियान चलाकर ऐसे नामों को सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आयोग ने राज्यों के गृह विभाग और खुफिया एजेंसियों से भी सहयोग मांगा है ताकि किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को रोका जा सके।
इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने नीतीश कुमार सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, "अगर वोटर लिस्ट में विदेशी नागरिकों के नाम हैं, तो ये लोकतंत्र के साथ धोखा है। क्या सरकार को इस बारे में जानकारी थी?" वहीं बीजेपी नेताओं ने कहा कि आयोग को पूरी छूट दी गई है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
खुफिया एजेंसियों ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। बिहार पुलिस के अनुसार, जिन लोगों के नाम संदेहास्पद पाए गए हैं, उनके दस्तावेजों की दोबारा जांच की जा रही है और अगर जरूरत पड़ी तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।