विदेशी छात्र बना रहे हैं विश्वविद्यालयों को ‘बैकडोर वर्क वीज़ा’ का जरिया

नई रिपोर्ट में खुलासा, ऑस्ट्रेलिया की वीज़ा प्रणाली पर गंभीर सवाल

विदेशी छात्र बना रहे हैं विश्वविद्यालयों को ‘बैकडोर वर्क वीज़ा’ का जरिया

ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और आव्रजन प्रणाली को लेकर एक गंभीर मुद्दा सामने आया है। हालिया विश्लेषण और सरकारी आंकड़ों के आधार पर यह खुलासा हुआ है कि हजारों विदेशी छात्र पढ़ाई के उद्देश्य से छात्र वीज़ा लेकर ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद कुछ ही समय में अपनी डिग्री बीच में छोड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई छात्र विश्वविद्यालयों का इस्तेमाल वास्तव में काम करने के लिए देश में प्रवेश पाने के “बैकडोर वर्क वीज़ा” के रूप में कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्र ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के कुछ महीनों के भीतर ही कक्षाओं में जाना बंद कर देते हैं या औपचारिक रूप से पाठ्यक्रम छोड़ देते हैं। इसके बाद वे पढ़ाई के बजाय पूर्ण या अंशकालिक रोजगार की तलाश में लग जाते हैं। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि कुछ एजेंटों और संस्थानों के जरिए छात्र वीज़ा प्रणाली का दुरुपयोग किया जा रहा है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रवृत्ति से ऑस्ट्रेलिया की उच्च शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को गहरा नुकसान पहुंच रहा है। विश्वविद्यालयों को जहां एक ओर आर्थिक घाटा उठाना पड़ता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की गुणवत्ता और साख भी प्रभावित होती है। इसके अलावा, ईमानदारी से पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों की छवि भी खराब होती है, जो वास्तव में शिक्षा और कौशल विकास के उद्देश्य से देश में आते हैं।

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि हाल के वर्षों में पाठ्यक्रम छोड़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई मामलों में छात्र ऐसे क्षेत्रों में काम करते पाए गए हैं जहां श्रम की कमी है, जिससे यह आशंका और मजबूत होती है कि शिक्षा उनका प्राथमिक उद्देश्य नहीं था।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार और आव्रजन विभाग ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों का कहना है कि छात्र वीज़ा नियमों को और सख्त किया जा सकता है। इसके तहत विश्वविद्यालयों से छात्रों की नियमित उपस्थिति और प्रगति की रिपोर्टिंग को अनिवार्य बनाने, एजेंटों की भूमिका की जांच करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समस्या पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो इससे न केवल देश की आव्रजन व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की वैश्विक शिक्षा बाज़ार में प्रतिष्ठा को भी दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह वास्तविक छात्रों और वीज़ा का दुरुपयोग करने वालों के बीच स्पष्ट अंतर कर सके।