फ़ॉरेस्ट सिटी: 155 अरब डॉलर का ‘ईको-पैराडाइज़’ कैसे एक अधूरा सपना बन गया

फ़ॉरेस्ट सिटी: 155 अरब डॉलर का ‘ईको-पैराडाइज़’ कैसे एक अधूरा सपना बन गया

मलेशिया के दक्षिणी किनारे पर फैले विशाल अपार्टमेंट टावरों की कतारें—यही है Forest City, एक ऐसा प्रोजेक्ट जिसे कभी ‘भविष्य का स्वर्ग’ कहा गया था। लेकिन आज यह चमक-धमक से भरी इमारतों का एक सूनापन बनकर रह गया है, जो उस महत्वाकांक्षा और अंधविश्वास का प्रतीक है कि अगर आप बना देंगे, तो लोग आ ही जाएंगे।

सपना: सिंगापुर से सटे एक स्मार्ट सिटी
चीनी रियल एस्टेट दिग्गज Country Garden ने जब इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी, तब दुनिया भर की निगाहें इस पर टिकी थीं। योजना थी कि समुद्र को भरकर करीब 20 वर्ग किलोमीटर जमीन तैयार की जाएगी, जहां 7 लाख लोग रहेंगे। हरियाली, स्मार्ट टेक्नोलॉजी, और सस्टेनेबल डिज़ाइन के साथ यह ‘eco paradise’ कहलाया गया।

हकीकत: खाली इमारतें और टूटी उम्मीदें
आज, उस आलीशान सपने की जगह एक अधूरी हकीकत है। दर्जनों गगनचुंबी अपार्टमेंट खड़े तो हैं, लेकिन अधिकतर खाली हैं। जो समुद्र तट कभी खुशहाल जीवन का प्रतीक होना था, वहां अब वीरानी है।

आखिर क्या हुआ?

  • चीनी प्रॉपर्टी मार्केट का पतन: Forest City को मुख्य रूप से चीनी खरीदारों पर निर्भर रखकर विकसित किया गया था। लेकिन 2021 के बाद चीन में रियल एस्टेट संकट ने इस मॉडल की नींव हिला दी।

  • अवास्तविक महत्वाकांक्षा: ‘सिर्फ बनाओ, लोग खुद आ जाएंगे’—इस सोच में न स्थानीय जरूरतों का ख्याल था, न लॉन्ग-टर्म रणनीति का।

  • आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता: मलेशिया की बदलती सरकारों और नियमों ने निवेशकों का भरोसा भी डगमगाया।

नतीजा: एक प्रतीकात्मक चेतावनी
Forest City अब सिर्फ इमारतों का समूह नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है जहां बिना ज़मीनी समझ के महाकाय प्रोजेक्ट खड़े कर दिए जाते हैं।

यह कहानी सिर्फ एक शहर की नहीं, बल्कि उस वैश्विक रुझान की है जहां रियल एस्टेट को विकास का पर्याय मान लिया गया—बिना यह सोचे कि क्या वास्तव में लोग वहां रहना चाहेंगे।