मानसिक रूप से बीमार महिला पर बर्बर हमला: दो पूर्व पुलिसकर्मियों को जेल

मानसिक रूप से बीमार महिला पर बर्बर हमला: दो पूर्व पुलिसकर्मियों को जेल

सिडनी, 8 अगस्त — ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में दो पूर्व वरिष्ठ कांस्टेबलों को एक मानसिक रूप से बीमार, नग्न और निहत्थी महिला पर अमानवीय हमला करने के मामले में तीन-तीन साल से अधिक की सजा सुनाई गई है।

पेनरिथ ज़िला अदालत ने शुक्रवार को पूर्व वरिष्ठ कांस्टेबल टिमोथी ट्राउच और नाथन ब्लैक को जनवरी 2023 में पश्चिमी सिडनी के एमु प्लेन्स में हुई घटना के लिए दोषी ठहराया। दोनों ने एक "वेलफेयर चेक" के दौरान महिला को मिर्ची स्प्रे, लात-घूसे और बालों से घसीटकर क्रूर तरीके से प्रताड़ित किया था।

अदालत में पेश फुटेज से पता चला कि महिला उस समय सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे नग्न अवस्था में बैठी थी और पानी के गड्ढे में नहा रही थी। वह मानसिक रूप से अस्वस्थ थी और हाल ही में स्किज़ोफ्रेनिया की दवा लेना बंद कर चुकी थी।

जज ग्राहम टर्नबुल एससी ने इस कृत्य को "कानून का सबसे गंभीर उल्लंघन" बताते हुए कहा, "यह कोई गलती नहीं, बल्कि सोच-समझकर किया गया, लगातार और बर्बर हमला था।" उन्होंने पाया कि दोनों अधिकारियों ने जानबूझकर महिला के जननांगों पर मिर्ची स्प्रे किया ताकि "अधिकतम दर्द" पहुंचाया जा सके।

सज़ा

  • नाथन ब्लैक: अधिकतम 5 वर्ष 9 माह की सजा, न्यूनतम 3 वर्ष 3 माह की जेल।

  • टिमोथी ट्राउच: अधिकतम 5 वर्ष 6 माह की सजा, न्यूनतम 3 वर्ष की जेल।

अदालत ने ब्लैक को घटना का वीडियो एक सहकर्मी को भेजने का भी दोषी पाया।

घटना के शर्मनाक विवरण
फुटेज में ब्लैक को महिला का मज़ाक उड़ाते और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते सुना गया। वह ट्राउच से पूछता है कि क्या उनके पास "टेसर" या "लंबा डंडा" है, जिस पर दोनों हंसते हैं। एक मौके पर महिला को सड़क पर घसीटा गया, जिससे उसकी पीठ छिल गई।

दोनों ने अदालत में दावा किया कि उन्हें महिला से "खतरा" महसूस हुआ, लेकिन जज टर्नबुल ने कहा कि "20–25 वर्ष के, शारीरिक रूप से मज़बूत पुलिसकर्मियों को इस निहत्थी महिला से कोई खतरा नहीं हो सकता था।"

पुलिस विभाग की प्रतिक्रिया
कार्यवाहक पुलिस आयुक्त डेविड हडसन ने इसे "अक्षम्य" और "न्यू साउथ वेल्स पुलिस के मूल्यों के खिलाफ" बताया। उन्होंने कहा, "यह पुलिस की वर्दी में छिपा वह चेहरा है जो हमारे समाज को नहीं चाहिए।"

यह मामला ऑस्ट्रेलियाई पुलिस संस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर उन परिस्थितियों में जहां मानसिक रूप से बीमार लोगों के साथ सहानुभूति और धैर्य की अपेक्षा की जाती है।