फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का ऐलान कर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस फैसले का जहां अरब जगत ने स्वागत किया है, वहीं अमेरिका और इज़राइल ने कड़ी आपत्ति जताई है। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस निर्णय को “शांति के प्रयासों के खिलाफ़” बताया है और फ्रांस को “गंभीर परिणाम” भुगतने की चेतावनी दी है।
मैक्रों का दो टूक बयान:
फ्रांस की संसद में दिए एक ऐतिहासिक भाषण में राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, “फिलिस्तीनी लोगों को न्याय और आत्मनिर्णय का अधिकार है। फ्रांस अब उन्हें एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है।
अमेरिका का विरोध:
व्हाइट हाउस ने फ्रांस के फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि यह एकतरफा कदम मध्य-पूर्व में शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है। अमेरिका का हमेशा से यह रुख रहा है कि इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच समझौते के तहत ही कोई अंतिम फैसला होना चाहिए।
नेतन्याहू की चेतावनी:
इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, “फ्रांस का यह फैसला आतंक को इनाम देने जैसा है। इससे शांति की उम्मीदें ध्वस्त होंगी और कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल इस फैसले के जवाब में “सख्त कूटनीतिक विकल्पों” पर विचार कर रहा है।
सऊदी अरब ने जताई खुशी:
दूसरी ओर, सऊदी अरब समेत कई इस्लामिक देशों ने फ्रांस के इस फैसले का स्वागत किया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “यह कदम फिलिस्तीनी जनता के दशकों पुराने संघर्ष को मान्यता देता है और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।”
भारत की प्रतिक्रिया का इंतजार:
अब सबकी निगाहें भारत पर टिकी हैं कि वह इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है। भारत पारंपरिक रूप से दोनों पक्षों के साथ संतुलन बनाए रखता आया है।