ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स स्थित हॉक्सबरी सिटी काउंसिल की डिप्टी मेयर सारा मैकमहोन एक प्रस्तावित विदेश यात्रा को लेकर विवादों में घिर गई हैं। यह यात्रा भारत के लिए एक “ऑल-एक्सपेंस-पेड” यानी पूरी तरह प्रायोजित दौरा बताई जा रही थी, जिसके बाद स्थानीय राजनीति और मीडिया में तीखी बहस छिड़ गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस यात्रा का उद्देश्य सांस्कृतिक और प्रशासनिक आदान-प्रदान बताया गया था। लेकिन जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, पारदर्शिता और नैतिकता को लेकर सवाल उठने लगे। कई स्थानीय लोगों और नेताओं ने इसे “पब टेस्ट में फेल” करार दिया — यानी आम जनता की नजर में यह निर्णय सही नहीं ठहरता।
स्थानीय अखबार ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद दबाव और बढ़ गया। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक पद पर बैठे प्रतिनिधियों को इस तरह के लाभ स्वीकार करने से पहले पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
विवाद बढ़ने के बाद डिप्टी मेयर पर सफाई देने का दबाव बना। हालांकि उन्होंने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह यात्रा समुदाय के हित में थी और इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिल सकता था।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जनप्रतिनिधियों के लिए इस तरह की सुविधाएं स्वीकार करना उचित है, और क्या इसके लिए सख्त नियमों की जरूरत है।
स्थानीय प्रशासन अब इस मामले की समीक्षा कर सकता है, जबकि जनता की नजरें आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।