बीमारियों पर ‘शक्ति’ प्रहार: कैंसर, डायबिटीज़ और ऑटो-इम्यून रोगों की दवाएं खुद बनाएगा भारत

बीमारियों पर ‘शक्ति’ प्रहार: कैंसर, डायबिटीज़ और ऑटो-इम्यून रोगों की दवाएं खुद बनाएगा भारत

नई दिल्ली। देश को स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने लोकसभा में बजट पेश करते हुए ‘बायोफार्मा शक्ति मिशन’ की घोषणा की। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भारत अब कैंसर, डायबिटीज़ और ऑटो-इम्यून जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं स्वदेश में विकसित करेगा। इसके लिए सरकार ने ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि देश में इन बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश उन्नत दवाएं अभी आयात पर निर्भर हैं, जिससे इलाज महंगा हो जाता है। बायोफार्मा शक्ति मिशन का उद्देश्य देशी अनुसंधान, उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा देना है, ताकि आम मरीजों को सस्ती और प्रभावी दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

इस मिशन के अंतर्गत अत्याधुनिक बायो-फार्मास्यूटिकल रिसर्च सेंटर्स, स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों को सहयोग दिया जाएगा। सरकार का फोकस जीन-थेरेपी, बायोलॉजिक्स और एडवांस्ड ड्रग डिलीवरी सिस्टम पर रहेगा।

इलाज होगा सस्ता, निर्यात बढ़ेगा

सरकारी दखल से जहां एक ओर मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम होगा, वहीं दूसरी ओर भारत वैश्विक स्तर पर बायो-फार्मा हब के रूप में उभर सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि इन दवाओं का निर्यात भी करेगा।

रोज़गार और इनोवेशन को मिलेगा बल

इस योजना से स्वास्थ्य और बायोटेक सेक्टर में हज़ारों नए रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही युवा वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स को नवाचार के लिए बड़ा मंच मिलेगा।

सरकार का कहना है कि बायोफार्मा शक्ति मिशन देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को नई गति देगा।