सिडनी, 12 अगस्त — सिडनी विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन इस बार माहौल पहले से कहीं अधिक गर्म है। विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित स्टूडेंट्स रिप्रेज़ेंटेटिव काउंसिल (SRC) के चुनाव और क्लबों के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने कैंपस को बहस, विरोध और विवादों का केंद्र बना दिया है।
हालिया चुनावों में लेफ्ट धड़े का प्रतिनिधित्व करने वाले सोशलिस्ट अल्टरनेटिव और ग्रासरूट्स गुटों ने अपनी ताक़त दिखाई, वहीं नेशनल लेबर स्टूडेंट्स (NLS) के एंगस फ़िशर की जीत ने समीकरण पलट दिए। सोशलिस्ट अल्टरनेटिव ने 23.9 प्रतिशत वोट पाकर नौ सीटों पर कब्ज़ा जमाया, जो पिछले कई वर्षों में उनका सबसे मज़बूत प्रदर्शन है।
दूसरी ओर, दक्षिणपंथी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाला सिडनी यूनिवर्सिटी लिबरल क्लब (SULC) भी अपनी मौजूदगी बनाए हुए है। 1933 में स्थापित यह क्लब कई पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों का राजनीतिक प्रशिक्षण स्थल रहा है। विश्वविद्यालय के पॉलिटिक्स, फिलॉसफी एंड इकनॉमिक्स (PPE) पाठ्यक्रम के साथ जुड़कर ये क्लब भविष्य के नेताओं को गढ़ने का दावा करते हैं।
लेकिन, राजनीति केवल चुनावी रफ्तार तक सीमित नहीं है। हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए विरोध-प्रदर्शन नियम प्रस्तावित किए—जिनमें बैनर लगाने, राजनीतिक ईमेल भेजने और कैंपस में सभा करने से पहले अनुमति लेने की शर्त शामिल है। छात्र संगठनों और शिक्षकों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।
विवाद यहीं खत्म नहीं होते। एक बैठक के दौरान रेड ज़ोन रिपोर्ट—जो यौन उत्पीड़न और क्लब कल्चर में हिंसा पर आधारित थी—को फाड़ देने की घटना ने व्यापक आलोचना को जन्म दिया। वहीं विश्वविद्यालय के छात्र अख़बार होनी सोइट ने एक वरिष्ठ पत्रकार को कार्यक्रम से हटाने का फ़ैसला लिया, जिससे मीडिया स्वतंत्रता पर बहस छिड़ गई।
सिडनी विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति केवल क्लबों के उत्थान-पतन की कहानी नहीं है, बल्कि यह विचारधारा, स्वतंत्रता और सत्ता-संतुलन की उस जटिल लड़ाई का प्रतिबिंब है, जो आने वाले वर्षों में ऑस्ट्रेलियाई राजनीति को भी आकार दे सकती है।