देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत बड़े पैमाने पर कर चोरी के मामलों का खुलासा हुआ है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर 2024-25 तक केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के क्षेत्रीय अधिकारियों ने कुल ₹7.08 लाख करोड़ की कर चोरी पकड़ी है। इसमें ₹1.79 लाख करोड़ की धोखाधड़ी केवल इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से संबंधित है।
सिर्फ FY2024-25 में ₹2.23 लाख करोड़ की चोरी
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी कि केवल चालू वित्त वर्ष 2024-25 में ही 30,056 मामलों में जीएसटी चोरी पकड़ी गई है। इनमें से 15,283 मामले आईटीसी धोखाधड़ी से जुड़े हैं, जिनमें ₹58,772 करोड़ की कर चोरी की गई है।
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में कुल ₹2.30 लाख करोड़ की जीएसटी चोरी पकड़ी गई थी, जिसमें ₹36,374 करोड़ की आईटीसी धोखाधड़ी शामिल थी। इसी प्रकार वित्त वर्ष 2022-23 में ₹1.32 लाख करोड़ की चोरी पकड़ी गई थी, जिसमें ₹24,140 करोड़ फर्जी आईटीसी दावे से जुड़े थे।
हर साल करोड़ों की धोखाधड़ी
वित्त वर्ष 2021-22 में ₹73,238 करोड़ और 2020-21 में ₹49,384 करोड़ की जीएसटी चोरी सामने आई। इन दोनों वर्षों में क्रमशः ₹28,022 करोड़ और ₹31,233 करोड़ की आईटीसी धोखाधड़ी उजागर हुई।
कुल मिलाकर, इन पांच वर्षों में जीएसटी चोरी के 91,370 मामले सामने आए हैं। इनमें से 44,938 मामले केवल आईटीसी से जुड़ी धोखाधड़ी के हैं।
सरकार ने उठाए कई डिजिटल कदम
पंकज चौधरी ने बताया कि कर चोरी को रोकने के लिए सरकार द्वारा कई ठोस कदम उठाए गए हैं। इनमें ई-इनवॉयसिंग, जीएसटी डेटा का विश्लेषण, रिटर्न में मिसमैच के आधार पर संदिग्ध मामलों की पहचान, और खुफिया जानकारी के आधार पर जांच शामिल हैं। इसके अलावा जोखिम आधारित ऑडिट प्रणाली भी अपनाई जा रही है।
कर वसूली के आंकड़े
सरकार के मुताबिक, इस अवधि के दौरान स्वैच्छिक रूप से ₹1.29 लाख करोड़ से अधिक की कर वसूली हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में शुद्ध सीजीएसटी संग्रह ₹10.26 लाख करोड़ रहा, जो संशोधित अनुमान (₹10.62 लाख करोड़) का 96.7 प्रतिशत है। वहीं, वित्त वर्ष 2023-24 में शुद्ध सीजीएसटी संग्रह ₹9.57 लाख करोड़ रहा, जो संशोधित अनुमान का 100.1 प्रतिशत था।