अमेरिका-भारत व्यापार विवाद: 50% टैरिफ से हिला भारतीय निर्यात

अमेरिका-भारत व्यापार विवाद: 50% टैरिफ से हिला भारतीय निर्यात

नई दिल्ली, 28 अगस्त 2025 | विशेष संवाददाता

अमेरिका ने भारत पर 27 अगस्त से 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। इससे पहले ही 7 अगस्त को ट्रंप प्रशासन भारत के उत्पादों पर 25% आयात शुल्क लगा चुका था। इस तरह अब भारतीय उत्पादों पर कुल मिलाकर 50% आयात शुल्क लग चुका है। इसका असर तुरंत तो दिखाई नहीं देगा, लेकिन आने वाले महीनों में भारतीय निर्यातकों, उद्योगों और करोड़ों रोजगारों पर इसका गहरा संकट मंडराने लगा है।


क्यों लगाया गया टैरिफ?

अमेरिका का तर्क है कि भारत रूस से सस्ते तेल की खरीद कर रहा है, जिससे अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही, अमेरिकी प्रशासन भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। यही वजह है कि भारतीय वस्तुओं पर इतना ऊंचा टैरिफ लगाया गया है।


कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित?

1. रत्न और आभूषण

  • भारत अमेरिका को हर साल 10 अरब डॉलर के रत्न-आभूषण निर्यात करता है।

  • पहले इन पर सिर्फ 2.1% शुल्क था, अब यह 52.1% हो गया है।

  • गुजरात (सूरत), महाराष्ट्र (मुंबई) और राजस्थान (जयपुर) इस उद्योग के बड़े केंद्र हैं।

  • नतीजा: लाखों कारीगरों की नौकरियों पर खतरा, डायमंड सिटी सूरत में निर्यात ऑर्डर रुकने लगे।


2. कपड़ा और बुनकर उद्योग

  • भारत के टेक्सटाइल निर्यात का 28% हिस्सा अकेले अमेरिका जाता है, जिसकी कीमत 10.3 अरब डॉलर से अधिक है।

  • अब तक इस पर 9-13% टैरिफ था, जो अब बढ़कर 63% से ज्यादा हो गया है।

  • तमिलनाडु (तिरुपुर), उत्तर प्रदेश (नोएडा), हरियाणा (गुरुग्राम), कर्नाटक (बेंगलुरु), पंजाब (लुधियाना) और राजस्थान (जयपुर) प्रभावित क्षेत्र हैं।

  • नतीजा: निर्यात ऑर्डर वियतनाम, बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे देशों को शिफ्ट होने लगे।


3. कृषि व मरीन उत्पाद

  • भारत हर साल 5.6 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद अमेरिका को निर्यात करता है।

  • इनमें मरीन उत्पाद, मसाले, चावल, डेयरी, फल-सब्जियां और हर्बल उत्पाद प्रमुख हैं।

  • सीफूड (झींगा मछली) सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।

  • नतीजा: पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों को भारी नुकसान, पाकिस्तान व थाईलैंड को फायदा।


4. लेदर और फुटवियर

  • भारत का यह निर्यात लगभग 1.18 अरब डॉलर सालाना है।

  • उत्तर प्रदेश (कानपुर, आगरा) और तमिलनाडु (अंबूर, रानीपेट) प्रमुख केंद्र हैं।

  • नतीजा: उत्पादन घटेगा, चीन व मैक्सिको को बाजार में बढ़त मिलेगी।


5. कालीन उद्योग

  • अमेरिका भारतीय कालीन निर्यात का 60% बाजार है।

  • पहले 2.9% शुल्क लगता था, जो अब 53% तक पहुंच गया है।

  • उत्तर प्रदेश (भदोही, मिर्जापुर) और जम्मू-कश्मीर (श्रीनगर) कालीन उद्योग के केंद्र हैं।

  • नतीजा: 30 लाख से अधिक श्रमिकों की आजीविका खतरे में।


6. हथकरघा और लकड़ी के उत्पाद

  • भारत हर साल 1.6 अरब डॉलर के हथकरघा उत्पाद अमेरिका भेजता है।

  • राजस्थान (जोधपुर, जयपुर) और उत्तर प्रदेश (मुरादाबाद, सहारनपुर) प्रमुख केंद्र हैं।

  • नतीजा: छोटे कारीगरों की फैक्टरियां बंद होने के कगार पर, चीन और तुर्किये को फायदा।


राज्यों पर सीधा असर

पंजाब

  • गारमेंट्स, मशीन टूल्स, ऑटो पार्ट्स और कृषि उपकरणों का लगभग 20,000 करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित।

  • लुधियाना के कपड़ा उद्योग में संकट, कई फैक्टरियों में कामकाज घटा।

उत्तर प्रदेश

  • कानपुर: चमड़ा उद्योग पर बुरा असर, 1500 करोड़ रुपये के ऑर्डर रुके।

  • भदोही-मिर्जापुर: कालीन उद्योग में 30 लाख श्रमिक प्रभावित।

  • वाराणसी: बुनकर और हथकरघा उद्योग में ऑर्डर घटे।

हरियाणा

  • पानीपत: टेक्सटाइल निर्यात में गिरावट, 2.5 लाख नौकरियां खतरे में।

  • रोहतक: नट-बोल्ट उद्योग में 70% निर्यात अमेरिका पर निर्भर, अब ऑर्डर ठप।

गुजरात

  • सूरत का डायमंड उद्योग सबसे बड़ा हिट, 1 लाख से ज्यादा कारीगरों की नौकरी पर खतरा।

पश्चिम बंगाल

  • सीफूड: कुल 8,000 करोड़ में से 5,000 करोड़ का निर्यात प्रभावित।

  • चमड़ा उद्योग (कोलकाता): 5 लाख श्रमिक प्रभावित, 538 चमड़ा कारखानों में कामकाज ठप।


संभावित नतीजे

  • भारत को झटका: अरबों डॉलर का निर्यात प्रभावित, रोजगार संकट गहराया।

  • प्रतिस्पर्धी देशों को फायदा: चीन, वियतनाम, पाकिस्तान और तुर्किये भारतीय बाजार हिस्सेदारी हथियाने लगे।

  • सरकार की चुनौती: वैकल्पिक निर्यात बाजार तलाशना और घरेलू मांग को बढ़ावा देना।


निष्कर्ष

अमेरिका के टैरिफ से भारत के 48 अरब डॉलर तक के निर्यात पर सीधा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत ने तुरंत यूरोप, खाड़ी और एशियाई देशों में नए बाजार खोजने की रणनीति नहीं बनाई, तो आने वाले सालों में लाखों श्रमिकों की नौकरियां और अरबों डॉलर का निर्यात खतरे में पड़ जाएगा।