दिल्ली समेत कई बड़े एयरपोर्ट साइबर हमले की चपेट में, संसद में सरकार ने जीपीएस स्पूफिंग की बात स्वीकार की

दिल्ली समेत कई बड़े एयरपोर्ट साइबर हमले की चपेट में, संसद में सरकार ने जीपीएस स्पूफिंग की बात स्वीकार की

नई दिल्ली, 1 दिसंबर 2025। देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर पिछले दिनों सामने आई उड़ान व्यवधान की वजह अब साफ हो गई है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सोमवार को राज्यसभा में स्वीकार किया कि दिल्ली समेत कई बड़े एयरपोर्ट्स पर जीपीएस स्पूफिंग और जीएनएसएस इंटरफेरेंस जैसी गंभीर साइबर चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
सरकार की इस स्वीकारोक्ति के बाद सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।


दिल्ली एयरपोर्ट पर क्या हुआ था?

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किनजारापु ने बताया कि नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (आईजीआई) के पास उड़ने वाले कई विमानों ने हाल ही में जीपीएस स्पूफिंग की शिकायत दर्ज की।
यह समस्या रनवे 10 पर जीपीएस आधारित लैंडिंग प्रक्रियाओं के दौरान देखी गई। स्पूफिंग का आभास होते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तुरंत वैकल्पिक नेविगेशन प्रक्रियाएं लागू कीं, जिससे सभी विमान सुरक्षित रूप से उतरे।

मंत्री के अनुसार, अन्य रनवे पर पारंपरिक नेविगेशन सिस्टम होने के कारण वहां संचालन सामान्य रहा और उड़ानों पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा।


समस्या दिल्ली तक सीमित नहीं, कई बड़े एयरपोर्ट प्रभावित

सरकार ने बताया कि नवंबर 2023 से जीपीएस जामिंग/स्पूफिंग की रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है। इसके बाद से कोलकाता, अमृतसर, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई एयरपोर्ट सहित कई बड़े हवाईअड्डों में लगातार जीएनएसएस इंटरफेरेंस की शिकायतें सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह हस्तक्षेप विमान के नेविगेशन को प्रभावित कर सकता है और उड़ान सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती है।


क्या है जीपीएस स्पूफिंग?

जीपीएस स्पूफिंग एक साइबर हमला है जिसमें नकली सिग्नल भेजकर किसी भी नेविगेशन सिस्टम को गलत लोकेशन दिखाई जाती है।
जैसे किसी मोबाइल की लोकेशन अचानक कई किलोमीटर दूर दिखने लगे—वैसा ही प्रभाव विमान पर पड़ता है।
यदि विमान गलत दिशा में चला जाए तो गंभीर दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए ऐसे मामलों को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।


पहले संसद में क्या आंकड़ा दिया गया था?

इससे पहले सरकार ने लोकसभा में बताया था कि

  • नवंबर 2023 से फरवरी 2025 के बीच
    अमृतसर और जम्मू समेत भारत–पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में 465 जीपीएस स्पूफिंग की घटनाएं दर्ज की गईं।

  • अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (IATA) की रिपोर्ट के अनुसार,
    साल 2024 में वैश्विक स्तर पर 4.3 लाख जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग घटनाएं दर्ज हुईं, जो 2023 की तुलना में 62 प्रतिशत अधिक हैं।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में बढ़ता साइबर हस्तक्षेप विमानन सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।