ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की महत्वाकांक्षी "क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन" योजना को देश की प्रोडक्टिविटी कमीशन ने सैद्धांतिक हरी झंडी दे दी है, लेकिन इसके साथ ही चेतावनी भी दी है कि यह ऊर्जा क्रांति पहले के अनुमानों से कहीं अधिक महंगी साबित होगी।
कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, अगर देश को अपने निर्धारित जलवायु लक्ष्यों को समय पर हासिल करना है, तो सरकार को न सिर्फ भारी निवेश करना होगा, बल्कि बाजार में हस्तक्षेप की भूमिका भी पहले से अधिक निभानी होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सरकार समय पर और प्रभावी हस्तक्षेप नहीं करती है, तो बिजली ग्रिड पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है, जिससे देश में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है। कमीशन का मानना है कि निजी क्षेत्र अकेले इस बड़े बदलाव की लागत नहीं उठा सकता, इसलिए सरकारी भागीदारी और नीति-सहायता अपरिहार्य है।
क्लीन एनर्जी योजना में अक्षय ऊर्जा, पारेषण ढांचे का विस्तार, बैटरी भंडारण और हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों पर फोकस किया गया है। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी क्षेत्रों में निवेश की जरूरत मूल अनुमानों से काफी अधिक है। इससे सरकार पर राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है, जिससे अन्य योजनाएं प्रभावित होने का खतरा है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री अल्बनीज पहले ही ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव को अपनी प्राथमिकता घोषित कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट उन्हें अपनी नीति को और अधिक आक्रामक रूप से लागू करने का नैतिक आधार देती है, लेकिन इसके लिए उन्हें संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना होगा।