इज़राइली राष्ट्रपति के आमंत्रण पर विवाद, ग्रीन्स सांसद का सरकार पर तीखा हमला

इज़राइली राष्ट्रपति के आमंत्रण पर विवाद, ग्रीन्स सांसद का सरकार पर तीखा हमला

सिडनी, 14 जनवरी 2026 — बॉन्डी बीच में हुए यहूदी विरोधी आतंकी हमले को एक महीना पूरा होने पर, ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। ग्रीन्स पार्टी की सीनेटर महरीन फ़ारूक़ी ने इज़राइल के राष्ट्रपति को ऑस्ट्रेलिया आमंत्रित किए जाने को लेकर अल्बानीज़ सरकार पर तीखा हमला बोला है।

सीनेटर फ़ारूक़ी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि सरकार “युद्ध अपराधियों के लिए लाल कालीन बिछा रही है।” उन्होंने कहा कि इज़राइल ऐसे समय में सैन्य कार्रवाइयों में लिप्त है जिन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब ऑस्ट्रेलिया का यहूदी समुदाय बॉन्डी बीच में चानुका समारोह के दौरान हुए आतंकी हमले में मारे गए 15 लोगों की याद में शोक मना रहा है। यह हमला देश के इतिहास के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने इस हमले के बाद इज़राइली राष्ट्रपति को ऑस्ट्रेलिया आने का निमंत्रण दिया था। सरकार का कहना है कि यह दौरा पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने और ऑस्ट्रेलियाई यहूदी समुदाय के प्रति समर्थन जताने के लिए है।

विदेश मंत्री पेनी वोंग ने एक साक्षात्कार में कहा कि यह दौरा यहूदी समुदाय के लिए “एक महत्वपूर्ण संकेत” है और दोनों देशों के संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दौरे की आधिकारिक घोषणा प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की जाएगी।

सीनेटर फ़ारूक़ी ने इन बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि “नफ़रत के ख़िलाफ़ लड़ाई ऐसे लोगों को सम्मान देकर नहीं लड़ी जा सकती जिन पर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप हैं।”

हालांकि, विपक्ष ने इन आरोपों को सख़्त शब्दों में ख़ारिज किया है। विपक्ष की विदेश मामलों की प्रवक्ता माइकेलिया कैश ने कहा कि इज़राइली राष्ट्रपति एक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्राध्यक्ष हैं और उनका दौरा पूरी तरह उचित है। उन्होंने फ़ारूक़ी के बयान को “भड़काऊ और विभाजनकारी” बताया।

इज़राइल ने ग़ाज़ा में नरसंहार के आरोपों से इनकार किया है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दक्षिण अफ्रीका द्वारा दायर मामले में अदालत ने कुछ आपात निर्देश ज़रूर जारी किए हैं, लेकिन इज़राइल को नरसंहार का दोषी घोषित नहीं किया गया है।

ग़ौरतलब है कि सीनेटर फ़ारूक़ी पिछले कुछ वर्षों से फ़िलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती रही हैं। इस मुद्दे पर उनकी टिप्पणी ने एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया में मध्य-पूर्व संघर्ष को लेकर राजनीतिक और सामाजिक मतभेदों को उजागर कर दिया है।