ग्रीन्स के भरोसे अटका नफरत फैलाने वाले भाषण पर कानून, समर्थन को लेकर सरकार की ‘आशा’ कमजोर

ग्रीन्स के भरोसे अटका नफरत फैलाने वाले भाषण पर कानून, समर्थन को लेकर सरकार की ‘आशा’ कमजोर

कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया सरकार का प्रस्तावित हेट स्पीच (नफरत फैलाने वाले भाषण) से जुड़ा कानून इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। विपक्षी गठबंधन (कोएलिशन) की बढ़ती आपत्तियों और ग्रीन्स के साथ होने वाली कठिन बातचीत के कारण यह विधेयक संसद में फंसता नजर आ रहा है।

सरकार का कहना है कि यह कानून समाज में बढ़ती नफरत, भेदभाव और हिंसक भाषा पर रोक लगाने के लिए जरूरी है। हालांकि, कोएलिशन का तर्क है कि प्रस्तावित प्रावधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर सकते हैं और कानून का दुरुपयोग होने की आशंका है। इन्हीं कारणों से विपक्ष का समर्थन कमजोर पड़ता दिख रहा है।

ऐसे में सरकार की निगाहें अब ग्रीन्स पर टिकी हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्रीन्स अपनी शर्तों और संशोधनों के बिना समर्थन देने को तैयार नहीं हैं। इन संभावित मांगों से विधेयक का मूल स्वरूप बदल सकता है, जिससे सरकार के लिए संतुलन बनाना मुश्किल हो जाएगा।

अटॉर्नी-जनरल टोनी बर्क ने कहा है कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि किसी न किसी रूप में समर्थन हासिल हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह “आशा कमजोर होती जा रही है।” उनके बयान से साफ है कि सरकार खुद भी इस विधेयक के भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।

यदि ग्रीन्स के साथ बातचीत विफल रहती है और कोएलिशन का विरोध जारी रहता है, तो यह विधेयक या तो लंबे समय तक टल सकता है या फिर बड़े बदलावों के साथ दोबारा पेश किया जाएगा। फिलहाल, नफरत फैलाने वाले भाषण पर कानून बनाने की सरकार की कोशिशें राजनीतिक खींचतान के बीच अधर में लटकी हुई हैं।