नई दिल्ली। एक ताज़ा अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल करीब 74,000 शिशु हेपेटाइटिस-सी वायरस (HCV) से संक्रमित जन्म लेते हैं। इनमें से लगभग 23,000 बच्चे पांच वर्ष की आयु तक भी संक्रमण से मुक्त नहीं हो पाते, जिससे उनके जीवन में आगे चलकर गंभीर लिवर रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
अध्ययन में यह पाया गया कि इस संक्रमण के आधे से ज्यादा मामले केवल पांच देशों—पाकिस्तान, नाइजीरिया, चीन, रूस और भारत—में दर्ज होते हैं। इन देशों में गर्भवती महिलाओं में हेपेटाइटिस-सी की मौजूदगी और जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
शोध के अनुसार, एचसीवी से संक्रमित हर 100 गर्भवती महिलाओं में लगभग 7 नवजात शिशु गर्भ में ही वायरस से संक्रमित हो जाते हैं। राहत की बात यह है कि करीब दो-तिहाई बच्चे पांच साल की उम्र तक प्राकृतिक रूप से इस वायरस से मुक्त हो जाते हैं। हालांकि, शेष बच्चों में यह संक्रमण जीवनभर के लिए रह सकता है और आगे चलकर लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बन सकता है।
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. एडम ट्रिकी का कहना है कि यह निष्कर्ष नवजात शिशुओं में एचसीवी की जांच की अहमियत को दर्शाते हैं। बिना जांच और इलाज के यह संक्रमण जीवनभर की समस्या बन सकता है।
उन्होंने बताया कि अधिकांश मामलों में केवल तीन महीने की दवा से 90% से अधिक मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए समय पर पहचान और उपचार जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान एचसीवी की नियमित जांच को अनिवार्य किया जाना चाहिए और संक्रमित माताओं के बच्चों पर जन्म के बाद विशेष निगरानी रखनी चाहिए। इससे न केवल संक्रमण का समय रहते इलाज संभव होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में लिवर रोगों के मामलों में भी कमी लाई जा सकेगी।