व्हाइट हाउस में होगी ट्रंप–जेलेंस्की की ऐतिहासिक वार्ता

यूरोपीय और नाटो नेताओं की मौजूदगी से बढ़ेगी बैठक की अहमियत

व्हाइट हाउस में होगी ट्रंप–जेलेंस्की की ऐतिहासिक वार्ता

वॉशिंगटन : विश्व राजनीति का केंद्र अगले हफ्ते अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन होगा, जहां यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आमने-सामने बैठकर यूक्रेन युद्ध और यूरोप की सुरक्षा को लेकर अहम बातचीत करेंगे। इस मुलाकात को ऐतिहासिक इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि इसमें यूरोपीय संघ और नाटो देशों के कई शीर्ष नेता भी शामिल रहेंगे।

यूक्रेन संकट पर निर्णायक मोड़

रूस के साथ जारी युद्ध ने यूक्रेन को गहरी चुनौतियों में डाल दिया है। लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और देश की अर्थव्यवस्था युद्ध से चरमराई हुई है। पश्चिमी देशों की मदद के बावजूद यूक्रेन को अब तक निर्णायक बढ़त हासिल नहीं हो सकी है। ऐसे में व्हाइट हाउस की यह वार्ता यूक्रेन संकट के समाधान की दिशा में एक नए मोड़ के रूप में देखी जा रही है।

ट्रंप की पहली बड़ी कूटनीतिक परीक्षा

डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद यह उनकी पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय वार्ता होगी। ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति को लेकर दुनिया भर में सवाल उठते रहे हैं – खासकर रूस के साथ उनके संभावित रिश्तों को लेकर। यही वजह है कि यह बैठक ट्रंप के लिए एक कसौटी होगी कि वे नाटो और यूरोपीय साझेदारों के साथ किस हद तक तालमेल बैठा पाते हैं और यूक्रेन को कितनी ठोस मदद का आश्वासन देते हैं।

ब्रसेल्स में जेलेंस्की की कूटनीतिक तैयारी

इससे पहले जेलेंस्की ने ब्रसेल्स में यूरोपीय नेताओं से मुलाकात कर अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश की। उन्होंने दो टूक कहा कि “यूक्रेन की लड़ाई सिर्फ उसकी अपनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पूरे यूरोप की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है।” जेलेंस्की ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके देश को न केवल हथियारों और फौजी सहयोग की ज़रूरत है, बल्कि पश्चिमी देशों की राजनीतिक और आर्थिक एकजुटता भी उतनी ही अनिवार्य है।

नाटो देशों की रणनीतिक चिंता

नाटो देशों के लिए यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि रूस की आक्रामक नीतियां केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं हैं। बाल्टिक और पूर्वी यूरोप के कई छोटे देश लगातार सुरक्षा की चिंता में जी रहे हैं। इस वार्ता में रक्षा बजट, हथियारों की सप्लाई और सामूहिक सुरक्षा की गारंटी जैसे मुद्दे प्राथमिकता पर रहेंगे।

दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन पर

विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल अमेरिका और यूक्रेन के बीच सीमित वार्ता नहीं होगी, बल्कि वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगी। यदि ट्रंप ने यूरोपीय और नाटो नेताओं के साथ मिलकर यूक्रेन के लिए ठोस कदम उठाए तो रूस पर दबाव बढ़ेगा और युद्ध के हालात बदल सकते हैं। वहीं, यदि कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता तो यह रूस के हक़ में जाएगा और पश्चिमी एकजुटता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।