सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित एक प्रमुख सार्वजनिक अस्पताल में आपातकालीन विभाग (इमरजेंसी डिपार्टमेंट) की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने दावा किया है कि रात के समय आपातकालीन कक्ष में मौजूद सबसे वरिष्ठ डॉक्टर को औपचारिक रूप से “प्रभारी डॉक्टर” नहीं माना जाता। यह दावा डॉक्टरों के यूनियन द्वारा पाँच वर्षों के बकाया वेतन की मांग के बाद सामने आया है।
यूनियन का आरोप है कि रात की शिफ्ट में वरिष्ठ डॉक्टर ही पूरे आपातकालीन विभाग की जिम्मेदारी निभाते हैं। मरीजों के इलाज से जुड़े अहम निर्णय, जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का मार्गदर्शन, तथा गंभीर और जानलेवा मामलों का प्रबंधन इन्हीं डॉक्टरों के नेतृत्व में होता है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने उन्हें “इन-चार्ज” का दर्जा नहीं दिया, ताकि प्रति शिफ्ट लगभग 22.80 डॉलर की अतिरिक्त भुगतान राशि से बचा जा सके।
यूनियन का कहना है कि यह रकम भले ही प्रति शिफ्ट कम प्रतीत होती हो, लेकिन पाँच वर्षों की अवधि में यह राशि दसियों हज़ार डॉलर तक पहुँच जाती है। उनका आरोप है कि यह कदम लागत कटौती के नाम पर डॉक्टरों के पेशेवर अधिकारों और जिम्मेदारियों को नज़रअंदाज़ करने का उदाहरण है।
डॉक्टरों के प्रतिनिधियों ने चिंता जताई है कि इस तरह की नीतियाँ न केवल कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित करती हैं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करती हैं। उनका कहना है कि जब किसी विभाग की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से एक वरिष्ठ डॉक्टर के कंधों पर होती है, तो उसे औपचारिक मान्यता और उचित भुगतान मिलना चाहिए।
वहीं अस्पताल प्रशासन का पक्ष है कि मौजूदा रोस्टर और पदनाम प्रणाली के अनुसार रात की शिफ्ट में किसी डॉक्टर को आधिकारिक रूप से “प्रभारी” घोषित नहीं किया गया है। प्रबंधन का दावा है कि वेतन भुगतान नियमों और नीतियों के अनुरूप किया गया है।
इस विवाद ने ऑस्ट्रेलिया की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में बढ़ते कार्यभार, स्टाफ की कमी और बजट दबाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यूनियन ने संकेत दिया है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो वे कानूनी कार्रवाई या औद्योगिक आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।