नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक अग्रणी बना ऑस्ट्रेलिया का साउथ ऑस्ट्रेलिया

नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक अग्रणी बना ऑस्ट्रेलिया का साउथ ऑस्ट्रेलिया

एडिलेड।
ऑस्ट्रेलिया का राज्य South Australia आज नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल हो चुका है। सुनियोजित नीतियों, दीर्घकालिक सोच और प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग के बल पर इस राज्य ने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में ऐसा परिवर्तन किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

बीते एक दशक में साउथ ऑस्ट्रेलिया ने कोयला आधारित बिजली उत्पादन से धीरे-धीरे दूरी बनाते हुए पवन और सौर ऊर्जा को प्राथमिकता दी। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां—विशेष रूप से तेज़ और निरंतर चलने वाली हवाएं—पवन ऊर्जा उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल रही हैं। सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों से बड़े पैमाने पर पवन फार्म और सौर परियोजनाएं स्थापित की गईं।

आज स्थिति यह है कि कई अवसरों पर राज्य की कुल बिजली मांग का 100 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से पूरा किया जा चुका है। ऊर्जा भंडारण के लिए विशाल बैटरियों, उन्नत ग्रिड प्रणाली और स्मार्ट तकनीकों ने इस बदलाव को स्थायी और भरोसेमंद बनाया है। इससे न केवल बिजली आपूर्ति स्थिर हुई है, बल्कि ब्लैकआउट जैसी समस्याओं में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

राज्य सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि केवल एक पड़ाव है, अंतिम लक्ष्य नहीं। आने वाले वर्षों में साउथ ऑस्ट्रेलिया नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को और बढ़ाने, ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में निवेश करने तथा अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा को अन्य राज्यों और देशों को निर्यात करने की दिशा में काम कर रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि साउथ ऑस्ट्रेलिया का अनुभव यह सिद्ध करता है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति, तकनीकी निवेश और प्राकृतिक संसाधनों का सही तालमेल हो, तो स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ा जा सकता है। जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रही दुनिया के लिए यह मॉडल एक मजबूत संदेश देता है कि नवीकरणीय ऊर्जा केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के लिए भी लाभकारी है।