बुडापेस्ट (हंगरी) – हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में इस सप्ताहांत LGBTQ+ प्राइड मार्च को रोकने की सरकारी कोशिशें उल्टी पड़ गईं। इसके विरोध में 1.8 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए, जिससे यह देश का वर्षों में सबसे बड़ा सरकार विरोधी प्रदर्शन बन गया।
प्रदर्शनकारियों ने एलिज़ाबेथ ब्रिज पार करते हुए मार्च किया, जहां उन्होंने न केवल LGBTQ समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई, बल्कि प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन की सरकार पर लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं को कुचलने का आरोप भी लगाया।
पिछले कुछ वर्षों में हंगरी में LGBTQ अधिकारों को सीमित करने वाले कई कानून लाए गए हैं, जिनमें स्कूलों में समलैंगिकता और लिंग परिवर्तन के उल्लेख पर प्रतिबंध शामिल है। इस वर्ष सरकार द्वारा प्राइड मार्च पर संभावित प्रतिबंध की खबर सामने आने के बाद, देशभर में आक्रोश फैल गया।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “यह केवल प्राइड का मुद्दा नहीं है, यह हमारे अस्तित्व और आज़ादी की लड़ाई है। हम हंगरी को तानाशाही नहीं बनने देंगे।”
मानवाधिकार संगठनों और यूरोपीय संघ ने भी हंगरी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए LGBTQ समुदाय के खिलाफ बढ़ती असहिष्णुता पर चिंता जताई है।
पुलिस की भारी मौजूदगी के बीच मार्च शांतिपूर्ण रहा, लेकिन सरकार के लिए यह स्पष्ट संकेत था कि जनता अब और दबाव सहन करने को तैयार नहीं।
यह प्रदर्शन यह दर्शाता है कि हंगरी में केवल LGBTQ समुदाय ही नहीं, बल्कि आम नागरिक भी सरकार की सत्तावादी नीतियों के विरुद्ध एकजुट हो रहे हैं।