अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताज़ा आर्थिक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऑस्ट्रेलिया को आने वाले वर्षों में महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत से राहत मिलने में समय लगेगा। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर लगाए जा रहे शुल्क (टैरिफ) और व्यापारिक अनिश्चितताओं का असर ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
IMF का कहना है कि अमेरिका की टैरिफ नीति का प्रभाव धीरे-धीरे वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में दिख रहा है। अमेरिका में जहां मुख्य महंगाई दर 2027 तक 2 प्रतिशत के लक्ष्य पर लौटने का अनुमान है, वहीं ऑस्ट्रेलिया और नॉर्वे जैसे देशों में महंगाई लंबे समय तक लक्ष्य से ऊपर बनी रह सकती है।
ऑस्ट्रेलिया में नवंबर तक के 12 महीनों में वार्षिक महंगाई दर घटकर 3.4 प्रतिशत रही, जो पहले 3.8 प्रतिशत थी। वहीं, रिज़र्व बैंक द्वारा अहम मानी जाने वाली ‘ट्रिम्ड मीन’ महंगाई दर 3.2 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बावजूद यह दर केंद्रीय बैंक के 2 से 3 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महंगाई के साथ-साथ आर्थिक विकास दर भी फिलहाल रुझान से कम रहेगी। ऑस्ट्रेलियाई ट्रेज़री के अनुमान के अनुसार, महंगाई अगले वित्तीय वर्ष में लक्ष्य सीमा में लौट सकती है, लेकिन विशेषज्ञों के बीच ब्याज दरों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। कुछ बड़े बैंक रिज़र्व बैंक की अगली बैठक में दरों में बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं, जबकि अन्य इसे यथावत रहने का अनुमान लगा रहे हैं।
IMF के मुताबिक वैश्विक महंगाई में धीरे-धीरे कमी आएगी और यह 2026 में 3.8 प्रतिशत से घटकर 2027 में 3.4 प्रतिशत रह सकती है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक विकास दर 2025 में 1.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 2.1 प्रतिशत और 2027 में 2.2 प्रतिशत होने का अनुमान है।
ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्यक्ष ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है और कई देशों के लिए उच्च महंगाई अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने माना कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर आने वाले महीनों और वर्षों में ऑस्ट्रेलिया पर पड़ता रहेगा।
कुल मिलाकर, IMF की रिपोर्ट संकेत देती है कि भले ही ऑस्ट्रेलिया की वृद्धि दर अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर रहने की उम्मीद है, लेकिन आम लोगों के लिए महंगाई और जीवन-यापन की लागत का दबाव अभी लंबे समय तक बना रह सकता है।