बीजिंग/नई दिल्ली, 30 जून 2025:
भारत और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद को लेकर एक अहम प्रगति सामने आई है। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया बीजिंग दौरे के बाद चीन ने पहली बार डिलिमिटेशन (सीमा निर्धारण) पर बातचीत के संकेत दिए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि "भारत-चीन सीमा विवाद जटिल है, लेकिन हम बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने को तैयार हैं।"
माओ निंग ने आगे कहा कि,
"भारत के साथ सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के हित में है। हम डिलिमिटेशन जैसे मुद्दों पर चर्चा को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को राजनीतिक इच्छाशक्ति और समझदारी दिखानी होगी।"
डिलिमिटेशन यानी सीमा रेखाओं का स्पष्ट निर्धारण, भारत और चीन के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और अन्य इलाकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर दोनों देशों के बीच अक्सर तनातनी रहती है। कई बार यह विवाद हिंसक झड़पों में भी बदल चुका है।
पिछले सप्ताह राजनाथ सिंह चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपने चीनी समकक्ष के साथ सीमा विवाद, सैन्य वार्ता और क्षेत्रीय शांति जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस उच्चस्तरीय यात्रा को भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन की यह नरमी क्षेत्रीय दबाव, अंतरराष्ट्रीय छवि सुधार और आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए हो सकती है। वहीं भारत ने स्पष्ट किया है कि सीमा पर यथास्थिति बहाल करना और विश्वास बहाली आवश्यक है, तभी बातचीत आगे बढ़ सकती है।
अब दोनों देशों के बीच कार्यस्तरीय सैन्य और राजनयिक संवाद की अगली बैठकों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष:
राजनाथ सिंह की कूटनीतिक पहल से भारत-चीन संबंधों में नई बातचीत की खिड़की खुली है, लेकिन यह रास्ता अभी भी आसान नहीं है। सीमाओं का निर्धारण और विश्वास बहाली एक लंबी प्रक्रिया होगी, जिसमें दोनों देशों की सजगता और परिपक्वता की परीक्षा होगी।