अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की विवादित टिप्पणी पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में नवारो की बातों को ‘‘गलत, भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना’’ बताते हुए खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा हितों पर टिके हुए हैं और सरकार इन्हीं ठोस आधारों पर आगे बढ़ना चाहती है।
दरअसल, नवारो ने हाल ही में रूस से भारत के कच्चा तेल खरीदने को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत यूरोप, अफ्रीका और एशिया जैसे वैश्विक बाज़ारों में रूसी तेल बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा है। विवाद तब और गहरा गया जब नवारो ने यह दावा किया कि इस पूरे कारोबार से ‘‘सिर्फ़ ब्राह्मण वर्ग’’ को लाभ हो रहा है और भारतीय जनता को इसे रोकना चाहिए। उनके इस बयान को भारत ने न केवल आधारहीन माना, बल्कि इसे सामाजिक दृष्टि से भी विभाजनकारी करार दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा,
“भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, परस्पर हितों और मजबूत जन-स्तरीय संबंधों पर आधारित है। यह संबंध समय-समय पर चुनौतियों से गुज़रा है और हर बार और मजबूत हुआ है। भारत सरकार वर्तमान में द्विपक्षीय रिश्तों को मज़बूत बनाने के ठोस एजेंडे पर केंद्रित है और हमें उम्मीद है कि आपसी सम्मान तथा साझा हितों के आधार पर यह साझेदारी आगे भी प्रगाढ़ होगी।”
भारत ने नवारो की टिप्पणियों को एकतरफ़ा और अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसी बयानबाज़ी से दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना को ठेस पहुँचती है। सरकार ने साफ कर दिया कि भारत अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को लेकर बेहद गंभीर है और इन संबंधों को किसी भी स्थिति में संकीर्ण राजनीतिक बयानों से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।