India Crude Import: होर्मुज पर संकट के बीच भारत ने बदला रणनीति, रूस-अमेरिका से बढ़ाया कच्चे तेल का आयात

India Crude Import: होर्मुज पर संकट के बीच भारत ने बदला रणनीति, रूस-अमेरिका से बढ़ाया कच्चे तेल का आयात

नई दिल्ली, 22 जून 2025 – ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष की आशंका के बीच भारत ने अपने कच्चे तेल आयात की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार डेटा एजेंसी Kpler के अनुसार, जून 2025 में भारत ने रूस और अमेरिका से तेल आयात में उल्लेखनीय इजाफा किया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख रास्ता है, पर संकट गहराने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा था। इसके मद्देनज़र भारत ने समय रहते विकल्पों की ओर रुख किया और पारंपरिक पश्चिम एशियाई आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाई।

Kpler की रिपोर्ट बताती है कि:

  • भारत का रूस से जून में कच्चे तेल का आयात 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन के करीब रहा, जो पिछले महीने की तुलना में 12% अधिक है।

  • अमेरिका से आयात भी 35% बढ़कर 480,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने तेल विपणन कंपनियों को वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही निर्देशित कर दिया था ताकि अचानक आपूर्ति में बाधा या कीमतों में भारी उछाल से बचा जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम उसकी ऊर्जा सुरक्षा नीति की परिपक्वता को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल कीमतों में अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए भारत की यह रणनीति दूरदर्शी कही जा सकती है।

क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व?
यह संकरा समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है, जिसके ज़रिए दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री कच्चा तेल पारगमन करता है। यहां किसी भी प्रकार की सैन्य झड़प या अवरोध से वैश्विक तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।

भारत, जो अपनी ज़रूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, ने समय रहते उठाए गए इन कदमों से फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में रखा है। हालांकि, आने वाले दिनों में यदि हालात और बिगड़े तो वैश्विक बाज़ार में तेल की कीमतें और भारत की रणनीति दोनों एक बार फिर से कसौटी पर होंगी।