वाशिंगटन डीसी: भारतीय मूल की मथुरा श्रीधरन ने अमेरिका की सॉलिसिटर जनरल के रूप में नियुक्त होकर इतिहास रच दिया है। यह न सिर्फ भारतीय प्रवासियों के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और विविधता की दिशा में एक बड़ी जीत भी मानी जा रही है। हालांकि, इस उपलब्धि के बावजूद मथुरा को उनकी पारंपरिक पहचान — विशेष रूप से बिंदी पहनने — को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
मूल रूप से दक्षिण भारत की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली मथुरा श्रीधरन एक जानी-मानी संवैधानिक विशेषज्ञ और अनुभवी वकील हैं। उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल से स्नातक किया और वर्षों से अमेरिकी न्याय विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। न्यायपालिका में उनकी समझ, तर्कशक्ति और समर्पण के कारण उन्हें यह महत्वपूर्ण पद सौंपा गया।
मथुरा ने हाल ही में एक कार्यक्रम में बिंदी पहनकर शिरकत की थी। कुछ ऑनलाइन ट्रोलर्स ने इस पारंपरिक प्रतीक को 'गैरपेशेवर' बताने की कोशिश की। हालांकि, इसके विपरीत, सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लोगों ने मथुरा का समर्थन किया। उनका मानना है कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को अपनाना किसी भी प्रकार से उनकी पेशेवर योग्यता को कम नहीं करता।
भारतीय समुदाय के साथ-साथ अमेरिका में विविधता के समर्थकों ने मथुरा के पक्ष में आवाज उठाई। कई लोगों ने इसे 'सांस्कृतिक गर्व' का प्रतीक बताया और इस बात पर ज़ोर दिया कि आज के दौर में प्रोफेशनलिज़्म और पारंपरिकता में संतुलन संभव है। मथुरा श्रीधरन ने स्वयं ट्रोलिंग को अनदेखा करते हुए एक मजबूत संदेश दिया — कि एक महिला अपनी संस्कृति को अपनाकर भी सबसे ऊंचे पदों तक पहुंच सकती है।