दिमाग के किसी एक हिस्से की नहीं, पूरे ब्रेन नेटवर्क की देन है बुद्धिमत्ता: अंतरराष्ट्रीय शोध

दिमाग के किसी एक हिस्से की नहीं, पूरे ब्रेन नेटवर्क की देन है बुद्धिमत्ता: अंतरराष्ट्रीय शोध

मानव बुद्धिमत्ता (इंटेलिजेंस) दिमाग के किसी एक खास हिस्से में केंद्रित नहीं होती, बल्कि यह पूरे मस्तिष्क के आपसी तालमेल और समन्वित कार्यप्रणाली का नतीजा है। एक नए अंतरराष्ट्रीय शोध में यह अहम खुलासा हुआ है, जो नेटवर्क न्यूरोसाइंस की धारणा को और मजबूती देता है।

शोध के अनुसार, दिमाग अलग-अलग हिस्सों के बीच जितना प्रभावी जुड़ाव और तेज संचार करता है, उतनी ही बेहतर व्यक्ति की समस्या-समाधान क्षमता होती है। यानी अब सवाल यह नहीं कि दिमाग का कौन-सा हिस्सा बुद्धिमत्ता के लिए जिम्मेदार है, बल्कि यह कि दिमाग कैसे संगठित और जुड़ा हुआ है।

831 वयस्कों के ब्रेन डेटा का विश्लेषण

यह अध्ययन अमेरिका की University of Notre Dame के शोधकर्ताओं ने किया और प्रतिष्ठित जर्नल Nature Communications में प्रकाशित हुआ। शोध में ह्यूमन कनेक्टोम प्रोजेक्ट के तहत 831 वयस्कों के ब्रेन इमेजिंग और संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) डेटा का विश्लेषण किया गया। निष्कर्षों की पुष्टि के लिए 145 वयस्कों के एक स्वतंत्र समूह का भी अध्ययन किया गया, जिसमें समान परिणाम सामने आए।

दिमाग एक नेटवर्क की तरह करता है काम

अध्ययन के प्रमुख लेखक रैम्से विलकाक्स के मुताबिक, दिमाग एक नेटवर्क की तरह काम करता है। इसकी दक्षता, लचीलापन और एकीकरण जैसे गुण किसी एक हिस्से की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विशेषताएं हैं। जब दिमाग के दूर-दराज के हिस्सों के बीच भी तेज और सुचारु संचार होता है, तब सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है।

‘शॉर्टकट’ कनेक्शन बढ़ाते हैं समझ

मनोविज्ञान के प्रोफेसर एरान बार्बे बताते हैं कि दिमाग में मौजूद कुछ जटिल कनेक्शन ‘शॉर्टकट’ की तरह काम करते हैं। ये अलग-अलग ब्रेन रीजन को जोड़कर सूचनाओं के तेज आदान-प्रदान में मदद करते हैं। उनके अनुसार, स्थानीय विशेषज्ञता और वैश्विक जुड़ाव के बीच संतुलन ही सामान्य बुद्धिमत्ता को मजबूत बनाता है।

कोई एक केंद्र नहीं, पूरा सिस्टम जिम्मेदार

शोध का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि बुद्धिमत्ता के लिए दिमाग में कोई एक निश्चित केंद्र नहीं होता। अलग-अलग लोगों में दिखाई देने वाला अंतर पूरे ब्रेन नेटवर्क की कार्यप्रणाली से जुड़ा है, न कि किसी एक हिस्से से। वैज्ञानिकों ने इस संरचना को ‘स्मॉल-वर्ल्ड आर्किटेक्चर’ कहा है—ऐसा नेटवर्क जिसमें स्थानीय समूह मजबूत होते हैं और दूर के हिस्सों से भी उनका प्रभावी जुड़ाव बना रहता है।