तेहरान में बढ़ते तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री की एस. जयशंकर से बातचीत

तेहरान में बढ़ते तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री की एस. जयशंकर से बातचीत

तेहरान/नई दिल्ली।
ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच ईरान और भारत के बीच कूटनीतिक संपर्क तेज हो गया है। इसी क्रम में अब्बास अराघची, ईरान के विदेश मंत्री, ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की।

सूत्रों के अनुसार यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हैं और आंतरिक सुरक्षा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ती जा रही है। दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा चुनौतियों और आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

इन अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

बातचीत के दौरान:

  • ईरान के आंतरिक हालात और बढ़ते विरोध प्रदर्शनों की स्थिति

  • क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया में बदलते समीकरण

  • भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा

  • भारत–ईरान के बीच पारंपरिक मित्रतापूर्ण संबंधों और संवाद को बनाए रखने की आवश्यकता

पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

डॉ. जयशंकर ने बातचीत के बाद संकेत दिया कि भारत स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा संवाद के पक्ष में है। वहीं, ईरानी विदेश मंत्री ने भारत को मौजूदा परिस्थितियों से अवगत कराते हुए दोनों देशों के बीच नियमित संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया।

क्यों अहम है यह बातचीत

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन केवल आंतरिक मामला नहीं रह गए हैं, बल्कि उनका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे महत्वपूर्ण साझेदार देश के साथ ईरान की यह बातचीत कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, जो ईरान के साथ ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क (कनेक्टिविटी) में अहम भूमिका निभाता रहा है, मौजूदा संकट में संतुलित और सतर्क रुख अपनाते हुए अपने नागरिकों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है।

भारतीयों के लिए सतर्कता

बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने पहले ही ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। दूतावास स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

कुल मिलाकर, तेहरान में उभरते संकट के बीच भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच हुई यह बातचीत न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में कूटनीतिक प्रयासों का भी संकेत देती है।