तेहरान/वॉशिंगटन। परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी बातचीत के बीच ईरान ने अमेरिका को स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश कूटनीतिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी संभावित हमले की स्थिति में जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने दो टूक कहा कि बातचीत ही मौजूदा संकट का एकमात्र रास्ता है, हालांकि हाल की घटनाओं ने अमेरिका पर भरोसे को कमजोर किया है।
एक साक्षात्कार में अराघची ने कहा कि पिछले वर्ष जून में जब वार्ता आगे बढ़ रही थी, उसी दौरान हुए हमले ने ईरान को गहरा आघात पहुंचाया। उनके अनुसार सैन्य दबाव और धमकियां किसी देश की तकनीकी प्रगति को रोक नहीं सकतीं। स्थायी समाधान केवल संवाद और आपसी सम्मान से ही संभव है।
ईरान ने दोहराया है कि उसका यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और यह उसका संप्रभु अधिकार है। अराघची के मुताबिक, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए 5 प्रतिशत से कम संवर्धन पर्याप्त होता है, जबकि तेहरान रिसर्च रिएक्टर के लिए लगभग 20 प्रतिशत तक संवर्धित ईंधन की आवश्यकता पड़ती है, जिसका उपयोग कैंसर उपचार के लिए मेडिकल आइसोटोप बनाने में किया जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रतिशत से अधिक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्देश्य है। ईरान इस बात की गारंटी देने को भी तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, बशर्ते उसके वैध अधिकारों का सम्मान किया जाए।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के साथ बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी। बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों को वार्ता में शामिल करने की किसी भी मांग को उसने सिरे से खारिज कर दिया है।
दूसरी ओर, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चाहते हैं कि किसी भी संभावित समझौते में मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को भी शामिल किया जाए। इससे वार्ता के दायरे को लेकर मतभेद और गहरे होते दिख रहे हैं।
ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि बातचीत विफल होती है और दोबारा हमला किया जाता है, तो ईरान निर्णायक प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष इस्राइल और अमेरिका की बमबारी के बाद ईरान की सैन्य क्षमता संख्या और गुणवत्ता—दोनों स्तर पर मजबूत हुई है।
अराघची ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू क्षेत्र में तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और अमेरिका को बड़े टकराव की ओर धकेलना चाहते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी नए हमले की स्थिति में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर आ सकते हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईरान समझौता करना चाहता है। उन्होंने वार्ता को सकारात्मक बताया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि यदि डील नहीं होती तो “बहुत सख्त परिणाम” सामने आ सकते हैं। ट्रंप एक ऐसे समझौते के पक्षधर हैं, जिसमें परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ मिसाइल गतिविधियों पर भी कड़ी शर्तें हों।
ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता भले जारी हो, लेकिन दोनों पक्षों के बयानों से साफ है कि भरोसे की कमी और सैन्य तनाव का खतरा अभी भी बना हुआ है। कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ शक्ति प्रदर्शन की भाषा भी समानांतर चल रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बातचीत समझौते तक पहुंचती है या क्षेत्र में तनाव और गहराता है।