नई दिल्ली/तेहरान, 20 जून 2025 | हिंदी गौरव समाचार सेवा
ईरान और इज़रायल के बीच जारी भीषण संघर्ष अब वैश्विक महाशक्तियों की कूटनीतिक भिड़ंत में बदलता जा रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने तनाव को और भड़काया है। वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन ने खुलकर ईरान के पक्ष में खड़े होने का ऐलान कर दिया है।
ईरान द्वारा इज़रायल पर एक और मिसाइल हमले के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति पहले से अधिक विस्फोटक हो चुकी है। जहां अमेरिका और पश्चिमी देश इज़रायल के समर्थन में खड़े हैं, वहीं अब रूस, चीन और उत्तर कोरिया जैसे राष्ट्र खुलकर ईरान के साथ दिखाई दे रहे हैं।
पुतिन ने मास्को में एक आपात बैठक के बाद स्पष्ट रूप से कहा, “मध्य पूर्व में एकपक्षीय हमले अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। रूस ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए हर स्तर पर तैयार है।” इस बयान के तुरंत बाद चीन ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए संयुक्त राष्ट्र में इज़रायल के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन किया।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो फिर से राष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार हैं, ने ईरान को दो सप्ताह के अंदर "बिना शर्त आत्मसमर्पण" करने की चेतावनी दी है। उनका दावा है कि अगर ईरान नहीं झुकता, तो “पूरे क्षेत्र की धरती हिल जाएगी”।
विशेषज्ञों के अनुसार ट्रंप की यह आक्रामक भाषा केवल चुनावी रणनीति नहीं है, बल्कि अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेप का संकेत भी हो सकती है।
शी जिनपिंग ने एक बयान में कहा, “ईरान के खिलाफ कोई भी हमला, क्षेत्रीय शांति के खिलाफ साजिश है।” उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने तो यहां तक कह दिया कि “ईरान पर हमला, पूरी एशिया-पैसिफिक की सुरक्षा पर हमला है।”
विश्लेषकों का मानना है कि भारत जैसे देशों पर इस संघर्ष का असर पड़ सकता है, विशेषकर तेल आपूर्ति, खाड़ी में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा और चाबहार पोर्ट जैसे निवेश योजनाओं पर। भारत ने अभी तक किसी पक्ष का समर्थन नहीं किया है, पर कूटनीतिक स्तर पर स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है।